मोमबत्ती
Updated: Jun 2, 2023
By Ananya Joni
आज बड़े दिनों बाद मोमबत्ती जलाई मैंने। मोमबत्ती की थोड़ी सी रोशनी देख... अजीब सा सुकून मिलता है। इस तरह मोम को पिघलते देख दिल भी पिघलने लगता है। रात के अंधेरे में बस यूँ ही मोमबत्ती को लेकर गयी और खड़ी हुई आईने के सामने। रोज़ की गड़बड़ी भरी ज़िन्दगी में जो न कभी देखा और न ही महसूस किया यह खूबसूरती देख ली मैंने। आँखों की चमक व चेहरे का नूर दिल से महसूस किया आज मैंने। चलते चलते अनजाने में पिघला हुआ मोम मेरे हाथ में आ गिरा.. उसके गरम कण से हाथ जलने लगा.. और मैंने गुस्से से बत्ती बुझा दी। जब कमरे में अंधेरा छा गया.. तो दिमाग में अनेक सवाल उमड़ आए।
बिना उस रोशनी के दुनिया की नूर जैसे छिप सी जाती है। हम सब भी तो इस मोम की तरह है। मोम पिघलता है तो बाती जलती है। यही संसार का द्वैत नियम है। हम सब रोज़ ज्योति की गरमी से पिघलते है। रोज़ थोड़ा थोड़ा मिटते जाते है... जीवन प्रकाशित करने के लिए। जिस समय मोम निष्ठा से अपनी प्रकाश देने के कर्तव्य से मुक्त होकर शांति से टपक कर गिरती है.. तो बेशक हमें थोड़ा दर्द ज़रूर होगा.. मगर वह कुछ ही पल में जम भी तो जाती है। हम भी तो इस मोम की तरह है... जब हमारा कर्तव्य से मुक्त होने का समय आएगा तो लोगों को थोड़ा दर्द ज़रूर होगा.. पर अगले ही क्षण हमारा अस्तित्व मिट सा जाता है। जिसकी वजह से रोशनी व उष्ण मिली.. वह अगले ही पल बेवजूद बन जाता है। पर अंधेरा सबको उसकी कमी को याद दिलाएगा। और अंदर ही अंदर खाएगा भी। लोग कहते है बत्ती जलती है.. मगर मोम के बिना मोमबत्ती कैसा? मोम पिघलेगा नहीं तो बत्ती जलेगी कैसे? Ps: इस रचना में इंसान की तुलना मोम के साथ और बत्ती की तुलना जीवन के साथ किया गया है।
By Ananya Joni

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