मैं हूँ जिंदगी
By Vivek Chandel
पल-पल बदलती जिंदगी
खल-खल बहती जिंदगी
सुन-सुन कहती जिंदगी
मत सुन, मैं हूँ जिंदगी ।
बदलाव भी मेरा नाम है
बहाव ही मेरा काम है
न मैं रुकना जानू
न मैं थमना जानू
बरसातों का बादल हूँ
अंधियारों का काजल हूँ
रातों का चाँद हूँ
नहरों का बांध हूँ
एक कान्हे की किलकारी हूँ
एक दुष्ट की दुखियारी हूँ
एक पुत्र की सवारी हूँ
एक नर की नारी हूँ
कहीं स्त्री के साड़ी में, तो
कहीं बिमार के बिमारी में
कहीं मंदिर के पुजारी में, तो
कहीं किसान के कुदारी में
चल-चल चलती जिंदगी
सर-सर सरकती जिंदगी
सुन-सुन कहती जिंदगी
मत सुन, मैं हूँ जिंदगी ।
By Vivek Chandel

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