मैं वो सड़क हूँ
By Chaitali Deepesh Sinha
रोज़ की भागदौड़ में,
त्यौहार और महोत्सवों में,
शादी की शहनाइयों में,
अर्थी के जनाजों में,
मैं जो तुम्हारे पैरों के नीचे होती हूँ,
मैं वो सड़क हूँ|
जब रोज़ तुम्हें शाला और दफ्तर जाना होता है,
तुम मुझ पर तेज़ गति से वाहन चलाते हो,
तुम्हें सही जग़ह पहुंचाने,
तुम्हें सही दिशा बताने के लिए,
जो रोज़ घिसती हूँ,
मैं वो सड़क हूँ|
तुम कभी मुझ पर वाहनों की भीड़ जमा करते हो,
तो कभी अपने कदमों को पटक-पटक कर चलते हो,
तुम्हारी गन्दगी भी मैं खुद पर रखती हूँ,
तुम्हें पाताल से अलग करती हूँ,
हर छः महीने में खोदे जाने पर भी कुछ बोलती नहीं,
मैं वो सड़क हूँ|
न मैनें कभी तुम पर आरोप लगाए,
न ही तुम्हारी शिकायत भगवान से की,
मनुष्य और जीव सदा सुखी रहें,
हर वक़्त भगवान से यही प्रार्थना की,
तुम्हारी ख़ुशी और काम्याबी के लिए मैं रोज़ सहूंगी,
मैं वो सड़क हूँ|
By Chaitali Deepesh Sinha

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