मैं भारत हूं
By Shivam Kumar Mishra
मैं भारत हूं
मैं अजर, अमर, अलौकिक
मैं विश्व भर में लौकिक,
शुन्य निकला है मुझसे,
र्सूय पृकाशित है जिससे,
मैं गंगा को बहाने वाला हूं
मैं भारत हूं।।
मैं भारत हूं
मैं काशी, मैं बनारस, मैं प्रयागराज सा पावन हूं
मैं गंगोत्री, मैं यमनोत्री, मैं हार कि पौड़ी सा मनभावन हूं
मैं भारत हूं।।
मैं भारत हूं
मैं गरीबों का देश कहलाता हूं
मेरा सत्य नहीं ये, ये कथन मै बार बार झुठलाता हूं
सोने की चिड़िया कहलाता था,
मैं विश्व गुरु कहलाता था,
जो एकजुट होकर सब रहे होते,
हिन्दू-मुस्लिम ना बने होते,
तो मैं आज तलक विश्व- ज्ञानी होता,
मगर खेद नहीं,
खेद नहीं, गर्व है मुझे अपनी संतानो पर
मुझसे यह है और इन्ही से मैं,
मैं भारत हूं।।
मैं भारत हूं
वसुधैव कुटुम्बकम - ये मेरा नारा हैं,
मैं एकता का प्रचारक हूं
मैं भारत हूं।।
मैं भारत हूं
मैं रामायण, मैं महाभारत, मैंने भगवत गीता से जिवन का सार दिया,
यह जीवन-मृत्यु और मोह-माया से मैंने जग का उद्धार किया,
विश्व शुरू हुआ है मुझसे, सब लौट मुझीमे आयेंगे
मैं भारत हूं, मैं अजर, अमर, अलौकिक
यही बात सभी दोहरायेंगे,
मैं स्वाधिन, मैं स्वाभिमानी, मैं स्वतंत्रता का सैनानी,
मैं बस एक वतन नहीं, मैं प्रेम और समर्पण का संज्ञानी
मैं भारत हूं।।
मैं भारत हूं।।
By Shivam Kumar Mishra

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