मैं बदलाव हूँ - Main Badlaav Hun
By Smalika Jain
दिल के कोने में दबी हुई जो बात है,
मैं उसका एक एहसास हूँ।
तेरे दर्पण में बानी तस्वीर की
मैं भीनी सी मुस्कान हूँ।
चादर के सन्नाटे में,
मैं अंतर बुनता जाल हूँ।
अंधकार को रोंधती हुई
अग्नि सी ललकार हूँ।
गहरे अंधे सागर का
मैं मद-मस्त सा तूफ़ान हूँ।
घास की ओस सी मुलायम,
तो वर्षा की भी पुकार हूँ।
तेरे - मेरे भीतर छुपे हुए सैलाब का
मैं मीलों सा एहसास हूँ।
कण - कण में बसी हुई
मैं अनंत नाद का प्रयास हूँ।
जादू - टोना कुछ नहीं,
मैं तोह बस तेरे अंदर की आवाज़ हूँ।
By Smalika Jain

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