मैं तेरी परछाई हूं
By Kirti Thakur
तुझसे ही तो सिखा मैंने
हंसना रोना लाड लड़ाना
गिरकर उठना फिर संभलना
सबको खिलाकर फिर खुद खाना
तुझ सी ही तो दिखती हूं मैं
तेरी ही तो जाई हूं
पराई क्यों कहता है बाबुल
मैं तो तेरी परछाई हूं
तेरा खून दोड़ता रग-रग में
मन में स्वाभिमान समाया है
तूने ऊंगली थामी है मेरी
तभी तो चलना आया है
गुरूर हूं मैं तेरा, तेरे जीवन भर की कमाई हूं
पराया धन क्यूं समझे रे बाबुल
मैं तो तेरी परछाई हूं
तुझसे ही सब नखरे मेरे
तुझसे हर ज़िद पूरी होती है
धर सर कांधे पर थपकी देता
बाबुल, बेटी तब तेरी सोती है
फिर क्यूं तू मुझे समझाए
बेटी तो बेटी होती है
हंसी मेरी - खुशी तेरी ,
तेरी हर धड़कन में समाई हूं
क्यूं खुद से दूर करें रे बाबुल
मैं तो तेरी परछाई हूं…..
By Kirti Thakur

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