मैं तुम्हें फिर मिलूँगा
By Vidit Panchal
मैं तुम्हें फिर मिलूँगा तुम समय लो अपना जाओ, कुछ दुनिया घूम के आओ इतने किस्से लाओ के अगले कुछ महीनों रातों का इंतज़ाम हो जाए। हर समंदर का पानी और किनारे की रेत लाना लाना जो सबसे लज़ीज़ लगे जो अज़ीज़ लगे,साथ ले आना।
कोई ख़्वाब चमकदार या फिर अलादीन-सा किरदार ले आना साफ़-सुथरे कपड़ों में तो लौटना ही मत कुछ खरोंचें भी याद से ले आना। तुम समय लो अपना मगर आना ज़रूर मेज़ पर करके रोशनी इंतज़ार में सब तोहफ़ों के मैं, तुम्हें फिर मिलूँगा। By Vidit Panchal

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