मैं चाय हूँ जनाब
By Swati Sharma Singh
कोई पीता अदरक वाली
किसी को भाए मलाई मार
मेरे यहाँ कई दीवाने हैं
मैं चाय हूँ जनाब
बड़ी चर्चा हुई है मुझ संग
मेरी ही चुस्कियों के बीच
हो जाते हैं चुनाव
मैं चाय हूँ जनाब
कभी ठण्ड की गर्माहट हूँ
कभी आराम थकान मे
कई मर्ज़ का एक ही इलाज
मैं चाय हूँ जनाब
इस देश को जोड़ती
हर नुक्कड़ हर गली मे
कई स्वाद बदलती मिल ही जाती हूँ
कुल्हड़ वाली , कट्टिंग या तश्तरी
पीने के अंदाज़ बेहिसाब
मैं चाय हूँ जनाब
झपकी आये तो चुस्ती की खुराख हूँ
सबकी पहली ताज़गी की पसंद
ड्राइवर हो या साहूकार
मैं चाय हूँ जनाब
प्यार करने वालो का मौका
काम करने वालो की दोस्त
हर माहौल मे ढल जाती हूँ
हर मौसम की तलब का जवाब
मैं चाय हूँ जनाब
मेहमानो की आहट हो
या कोई पारिवारिक श्याम
या फिर हो अकेलेपन के लम्हे
सब मे लगा देती हूँ चार चाँद
मैं चाय हूँ जनाब
बस लगी रहती हूँ
आपकी सेवा मे
अब तक तो मन कर ही गया होगा
कैसे न करे , मेरा जिक्र है ही असरदार
मैंचायहूँजनाब
By Swati Sharma Singh

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