मैं कौन
By Karishma Karpe
तेरे आने से बेचैनी का अंत हुआ, खुद को खुद से मिलने का भ्रम हुआ l अपनी खुशियां समझ के जो तेरी खुशियों में डूबा, उबर ना पाया खुद ,ना तुम्हें उभरने दिया l गलतफहमी की राह पर जो खुशियां ढूंढने लगा, नालायक, गधा ,उल्लू मैं सब कुछ बन गया l भूल गया मैं खुद को जो तुमको ढूंढ लिया, अपने अस्तित्व और पहचान को खुद से कुचल दिया l जो अपने आप को ना जाना वह तुझको क्या समझा, विश्वास की दहलीज पर यह रिश्ता झुलस गया l बेवकूफी की हद ना फिर से है दोहराना अपने आप से है पहले प्यार करना फिर तुमको है पाना l
By Karishma Karpe

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