मैं उड़ना चाहती हूँ
By Poonam
मैं उड़ना चाहती हूँ
पिंजरे में कैद उस एक पंछी की तरह
जो अपने जीवन के हर पल में
आज़ादी के लिये तरसता है
मैं चमकना चाहती हूँ
आसमाँ के उन सितारों की तरह
जो चाँद की रोशनी में
खुद को छोटा समझते हैं
मुझे बनना है वो सूरज
जिसे देख सबको आशा की एक किरण दिखे
निराशा के अंधेरे में
जलता हुआ साहस का वो छोटा दीपक बनना चाहती हूँ मैं
मैं कायर नहीं हूँ
कमज़ोर नहीं हूँ
डरती नहीं हूँ किसी से
बस शांतिपूर्ण ढंग से
अपने हिस्से की जंग को लड़ना चाहती हूँ
दिखाना चाहती हूँ इस दुनिया को
कि मुझमें भी हिम्मत है
मेरा कद छोटा है तो क्या
मेरे इरादों को आसमान पाना है
आएगा वो एक दिन
जब मेरी आवाज़ बुलंदियों के उस शिखर पर होगी
कोई न होगा साथ मेरे तो क्या
बस सामने वो छोटी सी डगर होगी
चलूँगी मैं हर उस कठिन पथ पर
चाहे कितनी भी हों मुश्किलें मगर
मगर थककर नहीं बैठूंगी मैं
क्योंकि चलना है मुझे
चलना है मुझे अपने लिए
अपने जैसे उन हज़ारों-लाखों के लिए
जो डरकर-सहमकर
दब जाते हैं इस दुनिया के बोझ तले
आशा हूँ मैं उनकी
जो गुमनाम हो जाते हैं
मगर जाते जाते भी
किसी के काम आते हैं
मैं वो हूँ
जो दुख के साये में कहीं खो जाती है
मगर अब और नहीं…
मैं परेशानियों के साये में भी
बादल की तरह उड़ना चाहती हूँ
सितारों की तरह चमकना चाहती हूँ
और उस छोटे पंछी की तरह उड़ना चाहती हूँ…
बस उड़ना चाहती हूँl
By Poonam

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