मैं आवाज आठवीं आखिरी हूँ I
Updated: Jun 1, 2023
By Amol Mishra
पाषाण सुता मैं जल जाऊँगी,
जो तुम निश्चल प्रेम करो।
जनकसुता मैं छल जाऊँगी,
जो तुम जग परमार्थ करो।
बृजवासिन मैं ढल जाऊँगी,
जो बन त्रिभंग तुम योग करो।
वेदस्रुता मैं रम जाऊँगी,
जो तुम नित सत्संग करो।
मैं माया हूं, मैं मृगनयनी,
मैं जीवन की दाता हूँ।
मैं बरखा हूँ, मैं हाला हूँ,
मैं भाग्य भोग की भार्या हूँ।
मैं निःशब्द प्रेम की मूरत,
मैं सांसों की इच्छा हूँ।
मैं आकुल आँखों की हलचल,
मैं यौवन की व्याकुलता हूँ।
मैं इन्दिरा हूँ अड़ जाऊँगी,
जो तुम घर में द्रोह करो।
मैं कल्पना हूँ उड़ जाऊँगी,
जो तुम नभ से नेह करो।
मैं तुलसी हूँ उग जाऊँगी,
जो तुम सात्विक कर्म करो।
मैं आशा हूँ समां बन जाऊँगी,
जो तुम मेरे गीत कहो।
मैं शाश्वत ,प्रेम की डाली,
जो तुम मेरे वृक्ष बनो।
मैं ईश्वर , दुर्गा की वाणी,
जो तुम मेरा ताप करो।
मैं मृदुला मनमोहक मूरत,
तेरे सांचे में ढलती हूँ।
मैं विकृत सहमी सी सूरत,
तेरे पारे से जलती हूँ।
मैं साकार सृष्टि की बेटी,
मैं कण कण में जीवित हूँ।
मैं कोसी, मैं यमुना हूँ,
मैं तेरे कर्मों की कथनी हूँ।
मैं तृष्णा, मैं राखी तेरी,
जैसा देखो मैं वैसी हूँ।
मैं इमारत तेरे चरित्र की,
मैं निर्भया, मैं कैकेयी हूँ।
द्रुपदसुता मैं इक कटाक्ष हूँ,
जो तुम शकुनि चाल चलो।
मनु छबीली मैं लड़-बांकुर हूँ,
जो तुम जबरन घात करो।
मैं काली हूँ , रक्त पी जाऊँगी,
जो तुम राक्षस कर्म करो ।
मैं नारी हूँ, दासी बन जाऊँगी,
जो तुम मेरे कृष्ण बनो ।
मैं आवाज आठवीं आखिरी हूँ, सुन लो
जब तक मैं कहती हूँ..
By Amol Mishra

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