मेरे पापा
By Krishna Mahana
ये जो उंगली पकड़ के चलना सिखाया है वो मेरे पापा हैं,
सारी जिम्मेदारी को कंधे में लिए जो है वो मेरे पापा हैं ।।
बस खामोश हो के सारी मुश्किलों की हल निकाल लेते हो,
पूछे जब हम एक मुस्कुराहट से सारे सवाल टाल देते हो ।।
रोते नहीं कभी दर्द हज़ार हो के भी ना पलके हुई कभी नम,
वो पत्थर सी सीना देख के उनके वो आंसू भी गए थम ।।
आज पता चला भूख नहीं बोल के रोटी अपनी हमें दिए जो,
रात में उठ उठ के भूख मिटाने बस पानी पिए हो ।।
घर जो आऊँ देर कभी बेचैन खड़ा राहा ताकते हो ना,
आज भी भीड़ में पापा पहले जैसे हाथ थामते हो ना ।।
जिम्मेदारी की भार से बराबर हुए उनके कंधे को तोला जो,
बेचैनी कुछ ज्यादा थी ये बात जैसे वो चेहरे ने खुद बोला हो ।।
पापा आपसे हमारी होली रंगीन और दिवाली रोशन है,
पापा आपसे सजती हर त्योहार आपसे ही हमारी जशन है ।।
मां की ममता पे लाखों किताबे बेशक बिक्के होंगे ,
पापा के त्याग वाले किरदार सायद ही कोई किताब में लिखे होंगे ।।
मां अगर घर है तो पापा आपसे हमारा जहान है,
मां से अगर ज़िन्दगी है तो आपसे हमारी पहचान है ।।
जिन आंखो में दूसरों के सपने भरे हो वो सोते कब है,
जिसे हमारी खुशी की फिकर हो वो आखिर रोते कब है।।
सच बोलूं आसान नहीं होती एक बाप बनना,
दिल पे पत्थर लिए पड़ता है जो मुस्कुराना ।।
By Krishna Mahana

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