मेरी मोहब्बत
By Arati Prakash Mahalle
बिछड कर मुझसे उन्हे भी तोह दर्द होगा, ज्यादा कुछ नही उनके बात करणे का एक जरिया तोह कम होगा ...
कभी तोह आएगी मेरी याद, जब उन्हे बुखार होगा, दवाई ले ली है या मैं ले आऊ, ए केहणे वाला कोई नही होगा ...
उनको भी तोह खलेगी मेरी कमी उन चांदणी रातो मे, जो लमहे साथ बिताये थे उस चांद के हमने वोह भी तोह उन्हे याद होगा ...
वोह कुछ बोले उससे पेहले मेरा उनकी हर बात को समज जाना तोह उन्हे याद आएगा, जब चाहीए उनको एक कप चाय कोई पाणी का ग्लास पकडाएगा ...
गेहरी सोच मे बेठेंगे वोह की मेरे बदल जाने की वजह क्या होगी, युही रुसवा हु मे, या फिर बात करणे के लिए ए नए पेतरे अपना रही होगी ....
सोचमेसोचहोगीउनकेपरमेउनकेसाथनहीहोऊंगी, तबजाकेउन्हेमेरीमोहब्बतकीगेहराईपताचलपाएगी ...
By Arati Prakash Mahalle

Comments