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मेरी माँ मेरी नौकर नहीं है

Nov 25, 2022
2 min read

Updated: Jul 30, 2025

By RJ Rekha (Rekha Rani)


मेरी माँ ने क्या क्या सह कर मुझे अपनी कोख़ में पाला है,

वो कितनी ख़ुश थी ये सुनकर कोई अपना आने वाला है,


कितने ही दर्दों से होकर लगभग अपनी साँसें खोकर,

मुझको दुनिया में वो लाई, सुनने को इस मुँह से माई,


फिर हर दिन गोद में ले लेकर, मुझको कितना सहलाती थी,

ख़ुद भूखी होती थी चाहे, पर मुझको खूब खिलाती थी,


मैं रोता तो वो रोती थी, मैं हँसता तो ख़ुश होती थी,

मेरी दुनिया थी बहुत बड़ी, पर उसकी दुनिया छोटी थी,


वो मुझको ख़ूब सजाती थी, लेकिन फिर डर सी जाती थी,

कहीं नज़र ना लग जाए मुझको,काजल का तिलक लगाती थी,


मुझे आज भी याद है मंज़र वो,जब पहले दिन मैं स्कूल गया,

माँ इस चिंता में डूबी थी, सब लोग नये माहौल नया,


मैंने मुड़कर जब देखा तो, वो हँस कर हाथ हिलाती थी,

पर मुझको अब भी याद है वो, मुड़कर आँसू छलकाती थी,


चंदन का एक छोटा टीका, वो मुझको रोज़ लगाती थी,

और मुझको घर ले जाने को, वो दौड़ी दौड़ी आती थी,


कहीं मुझे कोई तकलीफ़ ना हो, घर बैठे भी डरती थी माँ,

खाना खाया या नहीं ,मेरी कितनी चिंता करती थी माँ,


कितनी सारी अच्छी बातें, माँ ने ही मुझे सिखाई थी,

मेरी हर इक ज़िम्मेदारी, उसके ही तो सर आई थी,


बाबा भी मेरे अच्छे हैं, उनकी भी कहानी लंबी है ,

पर इस कविता की हीरो तो, कोई और नहीं बस मम्मी है,


बचपन से मेरी माँ ने ही तो, मिश्री दही खिलाया था

अपनी हर एक परीक्षा में, मै अव्वल नंबर आया था,


मेरी दुल्हन को लेकर माँ ने, कितने ख़ाब सजाये थे,

कितने गहने, कितने कपड़े, माँ ने ही उसे थमाये थे,


हर चीज़ उसे यूँ सौंपी थी, जैसे वो उनकी बिटिया हो,

कोई ख़बर ख़ुशी की लाये जो, वो ऐसी सुंदर चिठिया हो,


माँ ने अपने सारे सपने, जैसे मुझ पर क़ुर्बान किये,

मैं कभी चुका ना पाऊंगा, जितने मुझपर एहसान किये,


पर बदले में क्या मैं भी माँ पर, उतनी जान लुटाता हूँ?

क्या मैं भी माँ को,कभी लपक कर, दिल से गले लगाता हूँ?


उसने खाना खाया या नहीं, क्या कभी ये मैंने जाना है?

जितना उसने मुझको समझा, क्या मैंने उसको माना है?


मैं खर्चा घर का देता हूँ, क्या इतना ही बस काफी है?

क्या कभी मेरी गलती पर मैंने,माँ से मांगी माफ़ी है?


क्या कभी मेरी माँ के आँसू, अब मुझे दिखाई देते हैं??

क्या कभी उसे मैं बाहों में ,भर कर इतना कह पाता हूँ?


माँ तुम ही मेरी दुनिया हो , बस तुम ही हो पहले सबसे,

मैं और भला अब क्या चाहूँ ,जब तुमको पाया है रब से,


मेरी माँ मुझे हँसाने को ,अक़्सर बनती है जोकर,

वो सब कुछ है इस घर की लेकिन,

नहीं किसी की नौकर..

हाँ नहीं किसी की नौकर...


By RJ Rekha (Rekha Rani)




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