मेरी माँ
Updated: Jul 30, 2025
By Kratika Agrawal
स्कूल का हो पहला दिन
या हो एक्जाम की तैयारी
मेहनत मां ने की
और मैं पड़ गयी सब पे भारी।।
लड़ाई हुई कुछ दोस्तों से
और रुठ गए हम
मां ने कहां चलता रहता है
ऐसे थोड़ी होती है दोस्ती खत्म।
जैसै तैसे स्कूल खत्म हुआ
अब कालेज की थी बारी
समझ नहीं आया क्या चूने
तब मां ने दी सलाहकारी।।
चुन लिया हमने
और शुरु हुई भविष्य की तैयारी।
थोड़े हम लापरवाह थे
थोड़े किस्मत ने उजाले छीन लिए
जिंदगी जब कुछ खट्टी हुई
मां ने मिठे पूए तल दिए।
जब नौकरी की थी बारी
तब जस्बा तो बहुत था
पर अधूरी थी तैयारी
पर मां ने कहां
बस हौसला मत खौना
बाकी भगवान् की जिम्मेदारी।
जब चुनना था हमसफर को
बहुत से सवाल फिर हुए खड़े
मां ने कहां दिल की सुनना बस
चाहें रास्ते में हो कितने ही पत्थर पड़े।
अब तक का सफ़र सुनहरा था
आगे की भी सुखद होगी घड़ी
सब कुछ आसान लगता है
जब साथ में मां हो खड़ी।
By Kratika Agrawal

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