मेरी बेटी - मेरा अभिमान!
By Sarita Jain
भुलाए नहीं भूलता कोविड-१९ का वो कहर,
कैसे एक बेटी ने पीया हंसते हुए अपनी तकलीफ़ों का ज़हर।
मैं हूं ना, मैं चलूंगी आपके साथ,
जब पापा को अस्पताल ले जाने की आयी बात।
पापा आप मन में रखो विश्वास।।
हंसते हुए बेटी निभाती रही अपना फर्ज़,
भूल गई अपनी सारी तकलीफे और मर्ज़।।
ना आई चेहरे पर ज़रा-सी भी शिकन,
आंसू भी पी गई अपने मन ही मन।
खुद हो जाती थी कई बार निगेटिव,
पर हम सबको रखती थी हमेशा पॉजिटिव।
तेरी हिम्मत से ही पापा में हिम्मत आई है,
अपनी जिम्मेदारी तूने बखूबी निभाई है।
सिर्फ़ पापा-मम्मी और भाई-बहन को ही नहीं,
पूरे परिवार को तुझ पर फ़क्र है।
अपने पेशे की अलख तूने अपने परिवार से ही जलायी है।
डॉक्टर बनने का जज़्बा हमने तुझ में देख लिया,
अब तो एक परिपक्व डॉक्टर के रूप में तुझको देखना है।
तू हमेशा स्वस्थ रहे, मस्त रहे, व्यस्त रहे यही हमारी तमन्ना है।
By Sarita Jain

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