मेरी निम्मी
By Debanjali
छोड़ आया था किसी को मैं
सालों पहले बीच सड़क पर...
लौटना चाहा हजारों बार,
बहुत दूर आ गया था तब मगर।
भूला नहीं हूं आज तक उसे,
भूलना मुमकिन भी नहीं है,
सांसे हैं उसकी मगर
उनमें रूह मेरी बसती है।
वो मासूम, सोहनी सी थी...
उसकी आवाज़ जैसे कोई मीठी सी धुन हो-
हंसती तो ऐसा लगता
जैसे जिंदगी ने मेरी मुस्कुराया हो।
उसकी आंखों में सच्चाई
नूर बन के सजती थी,
जहां जाकर दुआएं रूकती है
वो उस जहां से आई थी।
आज भी बारिश की शामों में
उसी के गाने गुनगुनाता हूं,
अक्सर जब कोई पास ना हो
वो साथ है - यह सोच लेता हूं।
By Debanjali

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