मेरी दुल्हन
By Amreen Fatima
तुम मुहब्बत मेरी हो, ये किस तरह तुम्हें समझाऊं
पास में दो घड़ी बैठो, तो दिल के हाल तफसील से सुनाऊं
आंखों में आंखें डालकर, रेशमी जुल्फें तुम्हारी सहलाऊँ
रेशम से भी नाज़ुक हाथों को, अपने हाथों में ले पाऊं
तुम्हारे झुमकों से खेलूं, पायल लिया तुम्हें पहनाऊं
कुछ देर बिताओ मेरे संग, तुम्हें मेरी खुशबू से पहचान कराऊं
तुम्हारे लिए गीत कोई सुंदर सा गुनगुनाऊं
उन गीतों से ज़्यादा मीठी ,आवाज़ तुम्हारी सुन पाऊं
मेरे दिल की मलिका, खादिम मैं तुम्हारा बन जाऊँ
कुछ वक्त दो मुझे तुम, कदमों में तुम्हारे दुनिया सारी बिछाऊँ
तुम्हारे लिए खुशियां सभी चुन चुनकर लाऊं
सब खुशियों से बढ़कर तुम्हारी मुस्कराहट देख पाऊं
तुम्हारे आंसू सारे पी लूं, आवाज़ तुम्हारी बन जाऊं
दो पल बिताओ मेरे संग, तुम्हें अपना बनाऊँ
मेरे मुहब्बत की रंगीन चुनरिया से तुम्हें सजाऊं
सब श्रृंगार से बढ़कर, दुल्हन तुम्हें, अपनी बनाऊं
By Amreen Fatima

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