मेरी कहानी
By Pallavi Jawalkar
कहानी अधूरी सी है मेरी
इस कहानी का हिस्सा बन कर, इसे पूरा कर सकोगे क्या
ग़र मैं गुज़रुं कभी करीब से तुम्हारे
तो मेरी पायल की आवाज़ सुनकर, मुझे पहचान सकोगे क्या
मोहब्बत का इज़हार शायद कभी ना कर सकूं मैं
इज़हार किए बिना ही तुम ये समझ सकोगे क्या
हाथ पकड़ कर छोड़ देना मुझे आता नहीं है
हर राह, हर लम्हें में साथ निभाना है तुम्हारा
ग़र ये कहूं मैं, तो अपने साथ चलने की इजाज़त दे सकोगे क्या
By Pallavi Jawalkar

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