मेरी उड़ान हौंसले की
By Kuldeep Kumar
मेरी उड़ान हौंसले की मेरी पहचान बताएगी,
खिंचती मुझको पीछे जो वो उलझन सुलझाएगी,
लगा ले कितनी भी ताकत ज़माना मुझको झुकाने की,
इस हसरत को जमाने की ये ओंधे मुँह गिराएगी।
"मेरी उड़ान हौंसले की मेरी पहचान बताएगी।"
समझते खुद को जो सबकुछ हैं इस ज़माने में,
कसर छोड़ते नहीं जो कभी खुद को जताने में,
इस ग़लतफ़हमी को उनकी ये मिट्टी में मिलायेगी,
"मेरी उड़ान हौंसले की मेरी पहचान बताएगी।"
पंख खोल चुका हूँ मैं साहस दुगना है सीने में,
हिम्मत कई गुना है अब मजा है खुल के जीने में,
ज़माने में मुझे ये नया रूतबा दिलायेगी,
"मेरी उड़ान हौंसले की मेरी पहचान बताएगी।"
घमंड में चूर देखा है अक्सर रुतबेदारों को,
बिखरते खूब देखा है घमंडी होशियारों को,
गर्व हो घमंड ना हो तभी ये काम आएगी,
" मेरी उड़ान हौंसले की मेरी पहचान बताएगी।"
By Kuldeep Kumar

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