मेरी आशिकी तुम से ही
- Hashtag Kalakar
- Dec 10, 2024
- 17 min read
Updated: Dec 12, 2024
By Disha Darshan Shah
नाम ::: मेरी आशिकी तुम से ही....... वैसे गुलाब प्यार ओर दोस्ती का प्रतीक होता है,गुलाब के रंग तो बहुत सारे है जैसे पीला दोस्ती का तो केसरी पक्की दोस्ती का,ओर सफेद सारे गिले शिकवे मिटाकर वापस से एक अच्छे सच्चे दोस्त बनने की शुरुआत का,ओर सबसे आखरी है लाल गुलाब !!!!! लाल गुलाब का मतलब है प्यार !!!!!......... जब हम किसी से बहुत प्यार करते है और उसको एक लाल गुलाब देकर हम बिना कुछ कहें अपने प्यार का इज़हार कर देते हैं।।।वैसे प्यार एक खुबसूरत ओर प्यारा अह्सास होता है।वैसे हम प्यार को देख तो नहीं सकते पर महसूस जरुर कर सकतें हैं।प्यार में शब्दो की नहीं एक अह्सास की जरूरत है। लोग कहते हैं ना......प्यार में इंसान बदल जाता है अच्छे से बुरे बन जाते हैं ओर बुरे अच्छे बन जाते हैं।वैसे प्यार करना ओर प्यार करने वाले का दिल तोडना जितना आसान है उतना ही अपने प्यार को अच्छी तरह से निभाना मुश्किल है प्यार निभाने के लिए अंडर-स्टेंडिंग और कम्युनिकेशन बहुत जरुरी है।।।।।।।। मेरी इस कहानी में भी कुछ एसा ही हुआ हैं। दो लोग एक दुसरे को प्यार तो करतें हैं पर एक गलत फैमी के कारण ओर किसी के गलत इरादे के कारण वे लोग अलग हो जाते है पर उनका प्यार सच्चा होने की वजह से वे एक ना एक दिन एक हो ही जाते है।।।।"प्यार में दुरी जरुर आ जाती है पर प्यार कभी भी अधुरा नहीं रहता।वह समय और नियती के साथ एक हो ही जाता हैं।" एक बड़े घर का लड़का अभिनव खु़राना देखनें में जितना हैंडसम ओर चार्मिंग उतना ही स्वभाव से शांत ओर कम मिलनसार वैसे अभिनव के पापा मानव खुराना दिल्ली के सबसे बड़ा बिज़नेस थें।अभिनव खुराना का परिवार दिल्ली के परिवारों मैसे एक परिवार था। अभिनव अपनी मां से बहुत प्यार करता था,उसकी मां की मौत के बाद वह बहुत ही अकेला महसूस करने लगा था।मां के जाने के बाद दादी ही एक ऐसी इंसान थी जिसके वह सबसे करीब था। पर एक दिन दादी की भी मौत हो गई इसलिए वह ओर भी शांत ओर उदास हो गया।अभिनव कहीं ना कहीं यही सोच रहा था की वह जिससे भी प्यार करता है वह उससे छोड़कर चला जाता है,इसलिए वह सबसे अलग ही रहने लगा था। अभिनव अपने पापा की रिस्पेक्ट करता था ओर प्यार भी करता था पर वह अपना प्यार जताता नहीं था और काम सिखने के लिए ऑफिस में भी आता था,पर उन दोनों के बीच इतनी कम्युनिकेशन नहीं होती थी पर अभिनव की लाइफ में उसका एक दोस्त था विनय कपूर। जब भी अभिनव उदास होता था तब वह अपनें दोस्त के साथ ड्रिंक करके सारी दिल की बात बताता था। वैसे अभिनव पढ़ाई मे एवरेज था।दुसरी तरफ संजना गुप्ता एक मिडल क्लास लडकी।दिखने में जितनी सिंपल उतनी ही खूबसूरत ओर अट्रैक्टीव।वैसे संजना बहुत ही चंचल ओर मस्ती बाज़ लड़की थीं और उसका स्वभाव मिलनसार था।वैसे संजना के पिताजी की मौत के बाद सारा घर का भार उसके ओर उसकी मां शालिनी गुप्ता के उपर आ गया था,पर इतनी मुश्किलों के बाद भी संजना खुश मिज़ाज में अपनी लाइफ जीती थी।वह हमेशा सोचती थीं की लाइफ में मुश्किलो की कमी नहीं है पर उसके बीच अपना जीवन रुकता नही है तो हम जीना क्यों छोड़ें।वैसे संजना पढ़ाई मे बहुत ही होशियार थी और उसकी एक ही बेस्ट फ्रेंड थी छाया शर्मा।वैसे छाया का परिवार संजना के परिवार से काफी अच्छा था।संजना अपनी मां की मदद करने लिए छोटा मोटा काम भी करती थी ओर साथ मे पढ़ाई भी। एक दिन संजना को १२ के बोर्ड मे पुरे दिल्ली बहुत ही अच्छा स्कोर किया था, इसलिए उसे ठाकुर कोलेज में स्कॉलरशिप मिली थी। जहां पर बड़े बड़े घर परिवार के लोग एडमीशन लेते थें।वैसे अभिनव ने भी यहा एडमीशन लिया था।उन दोनों ने कॉमर्स लिया था।ओर इत्तेफाक से उन दोनों का क्लास रूम ऐक ही था।आज उन दोनों के कोलेज का पहला दिन था।जब छाया ओर संजना पहली बार कोलेज को बाहर से देखा तो वे लोग देखते ही रह गए। बाद में वे लोग कॉलेज के अंदर गए ओर वे लोग क्लास के अंदर जाने वाले होते है तब अचानक संजना का पैर मुड़ता है गलती से उसी समय अभिनव जो उसके पीछे खड़ा हुआ था उसने संजना को गिरने से बचा लेता है और।तब ही पहली बार संजना ओर अभिनव मिले फीर उनकी आंखे एक दुसरे से टकराई ओर वे लोग थोडी देर एक दुसरे को ऐसे ही देखते रहे जब संजना को छाया ने ओर अभिनव को विनय ने बुलाया तब वे लोग होश मे आए और अभिनव ने संजना को खड़े करके छोड़ दिया ओर बिना कुछ कहें वहा से चला गया और संजना बस उसको देखती ही रह गई। उसके बाद संजना छाया को बोली," कितना अजीब इन्सान था,थैंक्यू बोलने भी नही दिया"।तब छाया एक्साइटेड होकर बोली," पता है यह इंसान कोन है ? यह और कोई ओर नही खुराना कंपनी के मालिक का एक लौता बेटा है। यह सुनकर संजना नोर्मल पर एटीट्यूड दिखाते हुए बोली, "तो हमे क्या करना वह किसी का बेटा हो हमे तो बस अपनी पढ़ाई पर घ्यान देना चाहिए।"यह सब बात करते करते वे लोग क्लास के अंदर आ जाते है,क्लास के अंदर आने के बाद संजना अभिनव को एक नजर देखतीं है तब छाया बोलती है अभी तु उस तरफ क्यों देख रही है?तब संजना कहती है की,"मै उसे इस लिए देख रही थी क्योंकि मुझे बस उसको थैंक्यू कहना था, पर वह तो मेरी तरफ देख कर मुह घुमा दिया, "सच मे बहुत ही अकडु है यह तो "। तब छाया कहती है,"हैंडसम लडके ऐसे ही होते है"। तब संजना बोली," मैं एक बार उसको थैंक्स तो पक्का कहुंगी !! नही तो मुझे निंद नही आएंगी"। तब छाया बोली,"तेरी मर्जी पर फिलहाल तो सर आए तो थोडी पढ़ाई कर लेते है"? संजना बोली ,"हा!!!!" जब लेक्चर खत्म हुआ तब संजना अभिनव के पास गई ओर उसको थैंक्स कहने के लिए तब अभिनव पहले तो उसको देखा उसके बाद इस ओके!!!! कहकर वहां से चला गया तब संजना को उसके व्यवहार से गुस्सा आया ओर वह बोली की कितना रुड इंसान है तब पीछे से विनय कहता है, अभिनव रुड नहीं है पर वह बहुत कम बात करता है।बाय द वे, मैं विनय हु ओर आप?( ओर यह कहकर विनय अपना हाथ आगे बढाता है) ,(तब संजना हाथ मिलाकर )मैं संजना!! विनय:नए हो क्या? संजना:नही (छाया भाग कर आती है ,ओर संजना से कहती है) छाया:क्या यार तु मुझे छोड़कर आ गई। (संजना विनय को देखकर कहती है) संजना:यह मैरी दोस्त छाया। विनय (हाथ मिलाकर):हाई!! नाइस टु मीट यू। संजना:वैसे वह मतलब,,,, अभिनव कम बात क्यों करता है? विनय(हस्ते हूए):वह पहले से ऐसा है। संजना:ओहो!!!! विनय (सोचते हुए और बात को बदलते हुए):तुम लोगों को मैंने पहले यहां नहीं देखा? संजना:हम लोग नए है इधर इसलिए। छाया:वैसे आप अभिनव के पक्के वालें दोस्त हों? विनय:हा!!! क्यों,पुछ रही हों? छाया:बस ऐसे ही। विनय(संजना को देखकर):तुम सिरीयसली बहुत ही ज्यादा सुंदर हो। संजना(हस्ते हुए):प्लीज यह कहकर मेरे साथ फल्ट करना चालु मत कर देना? विनय ( बात को क्लीयर करके): नहीं.......नहीं......! मैं तो बस !! मुझे जो लगा वह मैने कह दिया।वैसे मेरा कोई ओर इरादा नहीं है। संजना (हस्ते हुए):तुम टेंशन मत लो मै मज़ाक कर रही थी। विनय(खुशी के मारे हाथ आगे करके):फ्रेंड्स? संजना(खुशी के मारे हाथ मिलाकर):फ्रेंड्स। ।।। छाया(एक्साइटेड होकर हाथ आगे करके):मै भी फ्रेंड्स? विनय (हाथ मिलाकर ओर हंसकर):हा!!!!! ऐसे ही वे लोग बात करते करते वहां से चलें गए। दुसरे दिन से अभिनव, विनय ओर संजना,छाया वे लोग साथ मे बैठ ने लगे और साथ मे लेक्चर मे भी बैठ ने लगे पर संजना को कहीं ना कहीं अभिनव का समझ में नहीं आता था,वे लोग साथ बैठते थें विनय मस्ती करता था पर अभिनव बस शांत ही बैठा हुआ रहता था।संजना को अभिनव के बारे मे जान ने की एक कयुरीयोसीटी होने लगी थी।इसलिए वह अभिनव को ओबझव करने लगीं और दुसरी तरफ छाया अभिनव के हैंडसम चहरे और उसके एटीट्यूड के कारण उस पर फिदा होने लगी थीं और छाया अभिनव को प्यार करने लगी थीं। देखते ही देखते एक महीना खत्म हुआ ओर वे चारो बहुत ही अच्छे वाले दोस्त बन गए। ओर बाद में उन लोगों को एक ग्रुप प्रोजेक्ट मिला था तो उस प्रोजेक्ट पर काम करते करते संजना ओर अभिनव विनय ओर छाया ओर भी ज़्यादा समय बिताने लगे प्रोजेक्ट के दौरान अभिनव इनडायरेकटली संजना की मदद करता था।पर कहीं ना कहीं संजना जानती थीं उसकी मदद ओर कोई नहीं अभिनव करता था,पर वह जताता नही था !!!!उसके यह अंदाज से संजना उसकी तरफ थोडी थोडी अट्रैक्ट हो रही थी।ओर छाया ने महसूस किया की संजना कहीं ना कहीं अभिनव के तरफ अट्रैक्ट हो रही है,पहले तो उसको थोडा गुस्सा आया की वह अभिनव के कैसे करीब जा सकती है?क्योंकि मैं अभिनव से प्यार करती हु।थोडे समय के बाद अपने गुस्से को शांत करके छाया ने सोचा की वह डायरेक्ट संजना से पुछले इसलिए वह संजना के पास जाकर उसको घुमा-फिराकर पूछती है छाया:क्या बात है आज कल तुम कुछ ज्यादा अभिनव के करीब जा रही हो,ओर उसको घूरती रहती हैं?प्यार हो गया है क्या? संजना(कॉन्फिडेंस के साथ):नही!!! मैं थोडी ना पागल हुं की, मै ऐसे इंसान को प्यार करुंगी जो सिर्फ शांत रहना पसंद है। मेरी चोइस इतनी भी बुरी नहीं है !!!,,, मैं इत्तेफ़ाक से उसको देखती हूं।।।" यह सब सुनकर छाया के दिल को सुकून मिला। एक दिन संजना उदास होकर कोलेज के कैंटीन मे बैठीं थी,तब विनय ने संजना को उदास होकर बैठें हुए देखा तो उसे रहा नही गया ओर वह संजना के पास जाकर बैठ गया। विनय:कुछ हुआ है क्या? संजना(उदास होकर):हा!! अभी बहुत टेंशन है? विनय (टेंशन मे):क्या हुआ? संजना(गंभीर होकर):मुझे जोब करना है, मेने दो जगह पर एप्लीकेशन डाला था जोब के लिए पर उनका अब तक कोई जवाब नही आया है और मुझे अपनी मां की मदद करनी है पर दिल्ली शहर मे काम मिलना कितना मुश्किल है?।।।।।। तो मैं सोच रही थी की मुझे जोब कहां मिलेंगी? विनय (संजना को समझाते):तुम टेंशन मत लो तुम्हे जोब मिल जाएं गी। मैं कुछ करता हु।। संजना(खुश होकर):क्या तुम मैरी मदद करोंगे? विनय:हा!!!! अभी उदास होकर मत बैठो चलों घर वैसे लेट हो गया है।यह कहकर वे लोग वहां से चले जाते हैं पर इत्तेफाक से यह सारी बात अभिनव सुन लेता है,पहले थोडी देर सोचने के बाद रात को अभिनव विनय को कोल करता है अभिनव: हाई क्या कर रहा है? विनय(सोते सोते):तु इस वक्त यह पूछने के लिए कोल किया है? अभिनव कुछ सेकंड के लिए चुप रहा उसके बाद, अभिनव:मैने आज तेरी ओर संजना की सारी बात सूनी। विनय(कन्फ्यूज हो कर):कोन सी बात? अभिनव:जो तु ओर संजना बात कर रहे थे जोब को लेकर। विनय: हां हां !!!तो? अभिनव:मेरे कंपनी मे एक फिमैल इम्पलोइ की जरूरत है,ओर संजना उस काम के लिए बडी़या रहेंगी तो कल उसको मेरे ऑफिस भेज देना मै अभी एच आर से बात करके रखता हु। विनय (कन्फ्यूजन मे): तु उसकी मदद क्यों करना चाहता है? प्यार व्यार हों गया हैं उससे? अभिनव (गुस्से मे): तुझे जो काम करने को बोला है वो कर ओके। विनय:हा बाबा,मै कह दुंगा।" दुसरे दिन सुबह विनय संजना को कोल करता है और कहता है की तुम्हे जोब करनी है ना?तो आज इंटरव्यू के लिए अभिनव के कंपनी मे चली जाओ तुम्हे जोब मिल जाएंगी।यह सुनकर संजना विनय को थैंक्यू कहतीं है और तैयार हो कर अभिनव के ऑफिस चलीं जाती है और वह सिलेक्ट भी हो जाती है।दुसरे दिन संजना काम पर चलीं जाती है। तो काम पर उसको अभिनव दिखता है तो वह खुशी के मारे एक्साइटेड होकर उसको हाय!! कहकर कहती है, "मैं तुम्हारे साथ इस फर्म में करने वाली हु,तो आज से हम साथ मे काम करेंगे,पर अभिनव उसको देखता है ओर वहां से बिना कुछ कहें चला जाता है।उसका ऐसा व्यवहार देखकर संजना को बहुत गुस्सा आता है और वहां से जाकर अपने डेस्क मे बैठ जाती है,ओर अपना काम संभाल ने लगती है पर अपने केबिन के पीछे से अभिनव उसको देखता है और जब संजना को पता चला की इस फर्म के दुसरे फ्लोर पर एक लाइब्रेरी है ,तो संजना को कभी भी समय मिलता था तब वह कुछ ना कुछ पढ़ने के लिए लाइब्रेरि जाती थीं क्योकि उसको किताबे पढ़ना बहुत पंसद था और अभिनव को भी किताब पढ़ना बहुत पसंद था तो वह भी जाता था।तब संजना कोशिश करती थी अभिनव से बात करने की पर अभिनव सिर्फ हां ना ओर ओके बस यही कहता था। देखते ही देखते संजना को उस फर्म में काम करते करते एक महीना हो गया और संजना के मस्ती ओर चुलबुले स्वभाव के कारण अभिनव भी थोडा खुश रहने लगा था ओर जो इंसान हमेशा अपने चहरे पर गंभीर ओर सिरीयस एक्सप्रेशन रखने वाले पर मुस्कान आने लगीं थी।अभिनव कोलेज ओर ऑफिस मे ज्यादातर संजना के साथ समय बिताने लगा था।जब यह सब छाया देखतीं थी तब उसको संजना पर बहुत गुस्सा ओर जलन आता था।एक दिन ऑफिस मे एक आदमी को पैसें की बहुत जरूरत आन पडी थी तब अभिनव ने बीना कुछ सोचे उसकी मदद कर दी।यह बात संजना के दिल को छु गई। जब संजना अपने ऑफिस का काम कर रही होती है तब उसका फोन बजता है तब वह नाम देखती है तो विनय का नाम देखकर वह फोन उठा लेती है। विनय:क्या यार आज कल तुम बहुत बिज़ी हो गई है?दोस्तो के लिए तो समय ही नही है? संजना:ऐसा नही है यार!!बस काम ज्यादा होता है इसलिए। विनय:वैसे अभिनव तुम्हारा ख्याल रखता है? वहां पे ?सोरी!!!!मैने गलत सवाल पूछा तुमसे? संजना(कन्फ्यूजन मे):मतलब? विनय:जो इन्सान ने तुम्हे जोब दिलवाई है वो तो तुम्हार ख्याल तो रखेगा ना। संजना(चौक ते हुए चिल्लाकर):क्या? विनय: हा उस समय अभिनव ने हमारी सारी बाते सुन ली थी, ओर उसने ही मुझे कहा था की तुम्हे यहा इंटरव्यू के लिए भेजु इसके लिए मैंने तुम्हें यहां भेजा था। संजना(बहाना करके):विनय मुझे कुछ काम आ गया है तो मै तुमसे बाद मे बात करती हु। यह कहकर उसने फोन रख दिया। उसके फोन रखने बाद ओर यह न्युज मिलनें के बाद अभिनव ने ही उसकी मदद की थी।वह जान ने के बाद उसके दिल मे एक अलग ही अह्सास अभिनव के लिए होने लगा और अभिनव के लिए उसकी इज्जत और भी बड गई।जब अभिनव ओर संजना लाइब्रेरि में होते है और दोनो का बुक पढ़ना हो जाता है तब अभिनव उसको अपनी बुक थमाकर कहता हैं की प्लीज तुम मैरी बुक रख दो गी।मुझे कुछ काम याद आ गया है यह कहकर अभिनव वहा से चला जाता है।देखते ही देखते सावन का महीना आ जाता है ओर उस समय संजना उपवास करती थी पर एक दिन वह खाने पीने की कमी के कारण वह बेहोश हो कर गिरने वाली होती है तब अभिनव उसको पकड़कर अपनी बाहो मे भरता है उसी समय छाया संजना को फल ओर कुछ उपवास के नास्ते के बहानें और अभिनव को मिलने के बहाने आती है तब छाया यह नज़ारा देखकर चौंक जातीं है जब अभिनव संजना की बहुत परवाह करतें देख छाया को बहुत दुख होता है और वह किसी को बीना बताएं वहां से चली जाती है।जब अभिनव उसको होश मे लाकर उसको थोड़ा ज़बरदस्ती खिलाने की कोशिश करता है तब संजना ना कहकर कहती है की आज मेरा उपवास है तो मैं नहीं खा सकतीं तब अभिनव उसको चिल्लाकर थोडा खाना खिला देता है।अभिनव के एसे व्यवहार से संजना उसको पंसद करने लगती है।उसके बाद वे लोग काम की वजह से या फिर खाने की वजह से ज्यादातर समय बीता ने लगे और संजना को देखते ही देखते अभिनव से प्यार हो जाता है।संजना ओर अभिनव को इतने करीब आते देख छाया को बहुत बुरा लगता है ओर वह हद से ज्यादा जलन के मारे वह संजना से नफरत करने लगती है और सोचती है की, मै उन दोनों को एक बिल्कुल नही होने दुंगी तब छाया एक प्लान बनाती है और उन दोनो के बीच ग़लत फहमी करने की सोचती है।वह अपने आप से कहतीं है की तूने मेरे से अभिनव को छीना है ना तो मैं अभिनव को तेरा भी नही होने दुंगी।।दुसरे दिन जब अभिनव कोलेज पहुंचता है तब संजना विनय के साथ मस्ती कर रही होती है तब अभिनव संजना को विनय से मस्ती करते देख मुस्कुरा रहा होता है तब छाया अभिनव के पास आती है और कहती है की, "विनय ओर संजना कितने क्यूट लग रहे है ना साथ में !!!!!ओर उनकी जोडी भी बहुत क्यूट हैं ना??" जब जोड़ी के बारे मे अभिनव ने सुना तो वह चौंक गया ओर थोडे समय पहले जो मुस्कान थी वह गायब हो गई।अभिनव ने छाया से पूछा जोड़ी मतलब??तब छाया मासूम चहेरा बनाकर कहतीं है की क्या तुम्हे नहीं पता संजना विनय को पंसद करती है ?ओर विनय भी।बस इकरार करना बाकी है।जब यह सब अभिनव ने सुना तों वह गुस्से ओर उदास होकर चला गया और अभिनव को एसे जाते देख छाया एक शातिर हंसी हस्ती है और कहती है की ,"प्यार मे ग़लत फ़हमी की हल्की दीवार तो खड़ी कर दी है",बस अभी एक काम ओर बाकी है उसके बाद पुरी दिवार खडी कर दुंगी उन दोनों के बीच में।यह कहकर वह अपने दुसरे प्लान में लग जाती है।जब अभिनव उदास ओर गुस्सा होकर बैठा हुआ रहता है तब छाया उसके पास जाती है ओर उसको पूछतीं है की कुछ हुआ है क्या?तब अभिनव कहता हैं की मुझे बस थोडी देर अकेला रहने दो जब छाया वहा से जाने वाली होती है तब वह देखतीं है की संजना अभिनव को मिलने आ रही होती है तब वह अभिनव के सामने आकर नाटक करके कहती है की अभिनव देखो ना मेरी आंख मे कुछ चला गया है ।तब अभिनव देखता है छाया को बहुत दर्द हो रहा तो वह खड़ा होकर उसकी मदद कर रहा होता है।तब पीछे से संजना को लगता है,अभिनव ओर छाया किस कर रहे है!!यह नजारा देख कर संजना चौंक कर ओर उदास होकर वहां से भाग जाती है।यह देखकर छाया के चहरे पर फिर से शातिर मुस्कान आ जाती है। पहले तो अभिनव से रहा नही गया पर वह रात का इन्तज़ार कर रहा था क्योंकि वे लोग रोज रात को क्लब में जाते थे इसलिए जब रात को अभिनव ने और विनय क्लब में मिले जहां वे लोग रोज मिलते हैं रोज की तरह बेट मिनटन खेलने के बाद वे लोग शांती से बैठे तब अभिनव ने बात चालु की काम को लेकर जब काम की बात खत्म हुईं तब अभिनव ने बातों ही बातों में पूछा की कोई लडकी पंसद आई है क्या?तब विनय ने कहां अचानक यह सवाल क्यो? नहीं मेंने देखा की आज कल तु संजना के बहुत करीब आ रहा है तो मुझे महसूस हुआ इस के लिए पूछा ?ऐसा है तो बता दे ?दोस्त से क्या छुपाना ?तब वह शरमाते बता देता है की वह संजना को पंसद करता है ओर कहता हैं की मुझे कहीं ना कहीं यह लग रहा है की वह भी मुझे पंसद करती है।यह सुनकर पहले तो अभिनव चुप हो गया। वह अपनी उदासी किसी को बतानी नहीं थी इसीलिए उसके बाद वह कुछ काम का बहाना करके निकल गया। दुसरी तरफ संजना ने छाया से पूछा की वह ओर अभिनव एक रिलेशनशिप में है?तब छाया जहरीली मुस्कान के साथ हा कहकर कहती है की मुझे तेरे को यह पहले बताना था पर नहीं बता पाई क्योंकि तु बहुत व्यस्त थी,अपने काम मे।संजना मे ओर कुछ ओर सुनने की हिम्मत नहीं थीं तो इसलिए वह भी कुछ बहाना करके वहा से निकल गईं।उसको उदास जाकर देख छाया बहुत ही खुश हो रही थी।बात करने के बाद संजना को बहुत ही रोना आ रहा था तो वह रो रहीं थी। दुसरी तरफ अभिनव अपने आप को कमरे मे बंध करके अपनी मां की फोटो को गले लगाकार वह भी रो रहा था।उस दिन के बाद वे लोग एक दुसरे को अवॉइड करने लगे पर संजना को अभिनव की बहुत याद आ रही थी इसलिए वह लाइब्रेरी चली गई। जब वह लाइब्रेरी मे पहुंची तब उसकी नजर उस बुक पर गई जो लास्ट टाइम अभिनव ने पढा था जब संजना उस बुक निकाल रही थी तब उसके हाथ से ग़लती से वह बुक गिर जाती है।जब वह बुक उठाने जाती है तो उस बुक मेसे एक गुलाब ओर एक लेटर निकलता है वह यह सब देखकर वह चौंक जाती है ।ओर अच्छे से देखने के बाद उसको पता चलता है की वह लेटर किसी ओर ने नही बल्कि खुद अभिनव ने लिखा था उसके लिए। तुम्हे यही लगता होगा ना!!! मै यह चिट्ठी क्यों लिख रहां हुं बहुत हिम्मत के बाद सोचा की जो मै तुम्हारे लिए महसूस करता हु वह मै तुम्हे बता दु की ,"मै तुमसे प्यार करता हु❤❤❤" वो भी उस समय से जब से मै तुम्हे पहली बार देखा पता नही तुम मे ऐसा क्या था की तुम्हे देखते ही मुझे तुमसे प्यार हो गया❤❤❤।ओर तुम्हारा मासुम चेहरा ओर तुम्हारी प्यारी आंखो को देखकर मै तुम पे फिदा हो गया।ओर तुम्हारी बचपने जैसी हरकत से मैं तुम्हारी तरफ कब अट्रैक्ट होने लगा मुझे पता हीं नहीं चला🥰🥰🥰।, मैं पहले से ही तुमसे अच्छे से बात नही करता था क्योकि मुझे डर लगता था तुम भी मुझे अपनी मां ओर दादी की तरह छोड़कर चली जाओ गी,पर मुझे आज महसूस हुआ की मै तुम्हारे बिना नही रह पाउंगा फिर भी तुम्हे सबके सामने बोलने की हिम्मत नही हो रही थी इसलिए मै यह खत लिखकर ओर तुम्हारा मनपसंद लाल गुलाब यह किताब के बीच मे रख रहा हु।जो तुम्हे मेरा प्यार कबुल हो तो मुझे सबके साम ने गले लगा देना।ओर तुम्हे मेरा प्यार मंजूर ना हो तो मेरे पास आ कर चलीं जाना मै समझ जाउंगा की तुम मुझसे प्यार नहीं करतीं।जो भी तुम्हारा फैसला हो तो मै उसकी इज्जत करुंगा। यह खत पढ़ने के बाद संजना पुरी तरह से चौंक जाती है,फिर वह बिना कुछ सोचे अभिनव के पास चली जाती है।जब संजना उसके केबिन मे जाकर अभिनव को गले लगा कर पूछती है की तुमने सच क्यो छिपाया?अभिनव संजना के ऐसे लगे मिलने से पहले तो चौंक जाता है और संजना को खुद से अलग करके पूछता है क्या छिपाया मैंने?तब संजना वह खत दिखाती है।वह खत देखकर अभिनव चौंक कर पूछता है की, तुमने अभी यह पढ़ा मैंने यह लेटर तुम्हे एक हफ्ते पहले लिखा था पर तुम बुक रखकर वापस आ कर चली गई तब मुझे लगा की तुम्हे मैं पंसद नही हू ।तब संजना कहती है की मैंने उस किताब को बस ऐसे ही रख दिया था इसलिए मुझे पता नहीं था।तब अभिनव कहता है की, हा!!! तुम ध्यान क्यों दोगी, क्योंकि तुम तो विनय से प्यार करती हो।जब संजना ने यह सुना तो वह चौंक कर बोली तुम्हे किसने बताया की मै विनय से प्यार करती हु,तब अभिनव छाया का नाम लेकर कहता है की उसने बताया।यह सुनकर संजना ओर भी ज्यादा चौंक जाती है ओर अपने आप से बात कहकर कहती है की छाया ने ऐसा क्यों कहां?जब अभिनव ने सुना यह तब अभिनव कहता है की क्योंकि तुम विनय से प्यार करती हो इसलिए तब संजना चिल्लाकर कहती है अभिनव से मै विनय से नही तुमसे प्यार करती हु!@!@@@ तो प्लीज तुम बार बार यह कहना छोड़ दो की मै विनय से प्यार करती हु। मैं तुम्हे उस दिन अपने प्यार का इजहार करने आई थी पर तुम खुद छाया को किस कर रहे थे,तो मैं वहां से उदास होकर चली गई।तुम भी छाया के साथ रिलेशनशिप मे हो ? मैंने तुम्हे कुछ कहा?? तुम मेरे को क्या बोल रहे हो!!!!!! अभिनव यह सुनकर हक्का बक्का हो जाता है, बाद मे वह बात को क्लियर करके कहता है मैं कभी भी किसी के साथ रिलेशनशिप में नहीं गया क्योकि मैं भी तुमसे प्यार करता हु वो भी पहले से!!@@@@@!!! ।उस दिन छाया की आंख मे कुछ चला गया था इसलिए मै सिर्फ उसकी मदद कर रहा था बस।।पर रिलेशनशिप की बात की किसने?तब संजना कहती है की मुझे छाया ने बताया। ऐसे ही बातों ही बातों में वे लोग अपने प्यार का इज़हार कर देते है और उनको पता ही नही चलता। जब उन लोगो का जगड ना बंद होता है ओर शांत होते है तब उन दोनों को रियलाइज होता है कुछ मिनट पहले उन लोगों ने अपने प्यार का इजहार किया है।तब संजना तो शरमा जाती है पर अभिनव उसको बाहों में भरकर किस कर लेता है।थोडे समय के बाद संजना अभिनव को कहती है की मुझे एकबार छाया से बात करनी है क्योंकि जो हमारे बीच मे ग़लत फहमी हुई है वह सब छाया के कारण हूई है। तब अभिनव उसको बाहों में भरकर ओर थोडी देर सोच कर कहता है की, कल तुम बात कर लेना अभी देर हो गई है, तब संजना हा मे सिर हिला कर ,,हा कहती है। दूसरे दिन वह छाया से मिलने कोलेज जाती है।ओर वह छाया कैन्टीन मे मिलती है तब संजना ने नो हाई ओर हेलो तुरंत ही उसके मुह पर थप्पड मार कर कहां की तुमने जो यह सब किया है ना बहुत ही ज्यादा गलत किया है पहले तो छाया को समझ नहीं आ रहा होता की संजना क्या बात कर रही है पर संजना उसे सारी बात बता देती है और पूछती है की यह सब क्यो किया? तब छाया गुस्से मे आकर ओर उसको धक्का दे कर बोला यह सब मैंने इसलिए किया क्योंकि मैं तुमसे नफरत करती हु।।। क्योंकि तुमने मुझसे मेरा प्यार छीना है ।तो मै तुम्हे मेरे प्यार के साथ कैसे रहनें दु।यह सब सुनकर संजना चौंक कर पूछती है तुम्हारा प्यार?तब छाया कहती है की अभिनव मेरा प्यार था ,पर तुमने क्या जादु किया उस पर की वह तुमसे प्यार करने लगा।ओर उसने मेरी तरफ देखना भी छोड़ दिया।जब मेरा प्यार सफल नहीं हुआ तो मै तुम्हारा प्यार कैसे सफल होने दु और मैं तुम दोनों को एक साथ नहीं देख सकतीं थी इसीलिए मैंने यह सब किया।जब पीछे से अभिनव ने यह सब सुना तब वह बोला की मैं पहले से ही संजना को प्यार करता था।।पहले से तुम मैरी अच्छी दोस्त थी। पर यह यह सब जो तुम ने जो किया है ना, इसके बाद तुम मैरी दोस्त भी नहीं रही।यह सब सुनकर छाया अंदर से टुट जाती हओर अभिनव से कहती है, मैने यह सब तुम्हारे लिए किया ओर तुम इस मामुली लडकी के कारण मुझे ठुकरा रहे हो ?तब अभिनव गुस्से मे आकर बोला यह मामुली लडकी नहीं है ।।यह मेरी मंगेतर है।।।। तो जबान संभालकर!!!! ओर अभिनव छाया को घमकी देकर कहता आज के बाद जो तुमने मैरी मंगेतर को हाथ लगाया या फिर हानी पहुंचाई तो मै तुम्हे नही छोडूंगा।संजना यह सब देखकर बहुत ही इमोशनल हो जाती है,ओर उसको खुश हो कर देखती है,यह कहकर अभिनव संजना का हाथ पकडकर वहा से चला जाता है।ओर छाया बस उदास होकर उन दोनो जाते हुए देखती है।कुछ दिन बाद अभिनव संजना को अच्छे से केंडल लाईट डिनर पे लेकर जाते उसको रिंग पहना कर प्रपोज कर देता है।।।।।।।।
By Disha Darshan Shah

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