मेरा सामान
By Shamim Merchant
सुना है तुम इस तरफ आने वाले हो,
सुना है.. तुम इस तरफ आने वाले हो।
मेरा जो सामान तुम्हारे पास है,
जो मुझ से पीछे छूट गया है,
क्या उसे लाने वाले हो?
शायद तुम्हें याद नही,
सोच रहे हो.. कौन सा सामान?
तुम्हारी उलझन है बिल्कुल सही।
चलो, लगे हाथ तुम्हें बताती चलू
मेरे सारे सामान की जानकारी देती चलू।
कमरे में खिड़की के पास
जो हमारी तस्वीर है,
उसे ज़रूर साथ लानी है तुम्हें
उन से जुड़ीं हुई यादें और आंसू तो में ले आई,
तस्वीर देख कर आती थी
चहेरे पर जो मुस्कान,
वो न जाने कैसे पीछे छूट गई?
अलमारी की तिजोरी में,
एक बहुत क़ीमती चीज़ रखी है।
तुम्हारा दिया हुआ तोहफा,
जो मुझे बेहद अज़ीज़ है।
दिल का लॉकेट; टूट गया था,
कुछ मेरे दिल की तरह।
अफसोस....
दोनों को ठीक करने का मौका न मिल सका।
वो मेरा टुटा हुआ दिल मुझे लौटाते जाना!
बिस्तर के पास दराज़ में,
अपनी डायरी भूल आई हूं।
ज़िन्दगी भर जो तुमसे कह न सकी,
वो सारा अहवाल उन पन्नों में दफ़ना आई हूं।
उन्हीं किसी पन्नों में मुरझा कर सूख गया होगा,
जो गुलाब कभी तुमने बड़े प्यार से दिया था,
वो डायरी... वो फ़ूल....
वो ज़ख्मों की निशानियां लेते आना।
माफ करना तुम्हें ज़हमत दे रही हूं,।
माफ करना तुम्हें ज़हमत दे रही हूं
लेकिन यक़ीन मानो,
तुम्हारी मुश्किलें आसाँ कर रही हूं
मै नहीं चाहती मेरी सारी चीज़ें देख कर,
मै नहीं चाहती मेरी सारी चीज़ें देख कर,
तुम्हारी नई दुलहन को कोई शक-ओ-शुबह हो।
देहलीज़ पार करते वख्त
जो सवालों का तूफान मेरे दिल में उठा था,
मै नहीं चाहती, तुम्हारी वफ़ाओं पर
उसे भी कोई बदगुमानी हो!
By Shamim Merchant

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