मेरा सपना
By Unnati Vora
सुनो सपनों की यह मेरी बात,
आए नींद में जो हर मेरी रात,
सोचूँ सपनों में है ऐसी क्या बात?
न छोड़े जागने पर भी मेरा साथ।
परियों के अब न देखूँ में सपने
डॉक्टर-इजनर के भी सपने मेरे अपने
पर लक्ष्य सेवा सिर्फ देश की है करना
सफल हो जावे तब मेरा यह सपना।
देखूँ सुहाने जब सपने यह ऐसे,
क्यों साथ देंगे कब मेरा यह कैसे?
खुली पलकों में दिखे जब इतना अंधेरा
होंगे साकार कैसे यह सपनों का पिटारा?
वकील,IAS या बनु IPS अमलदार
समाज में कानून से भगाऊँ भ्रष्टाचार।
प्रेरणा, आदर्श किरण बेदी तो है मेरी
चल पड़ी है किस्मत बस अब तो मेरी।
विकास ही विकास देखूँ में जब चहुं ओर
किरण आशा की मनमें करे तब कलशोर
दे सकती हूँ जब मानव को में आकार
तो कैसे न हों मेरे भी सपने साकार?
बदल सकती जब हूँ मैं देश के विचार
तो सपने भी मेरे कर सकती हूँ साकार।
फिर सुनो सपनों की मेरी यह बात
जो बने है हकीकत आज मेरे साथ।
By Unnati Vora

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