मेरा व्रत
By Sarika Vishal Dabhade
मैंने रखा था एक व्रत
खाऊँगी मैं मिर्च मसाला,
जिस दिन "न" आएगी
बहु हत्या की करुणामयी गाथा।
स्वजनों ने समझाया मुझे
रख यह व्रत कल से ,
भर ले पेट पहले, उन चीजो़ं से
बनी जो मिर्च मसाले से ।
सबको लग रहा था
न जाने लगेंगे कितने मास,
बैठी रहूंगी मैं ,
ऐसी ही
यह लगाए आस
जिसमें न हो बहु हत्या की कहानी ,
निकले ऐसा अखबार first class ।।
मैनें लिया व्रत उसी समय से
न खाई कोई चीज़
बनी जो मिर्च मसाले से ...
कह आयी थी कई घरों में,
कुछ समय के लिए अपना अखबार दें ..
अनुमति नहीं देता था बजट के सारे अखबार खरीद लें।
बीत गए कई मास
अखबार हर दिन देखते थे,
हम लगाए बैठे थे आस
पर एक भी दिन ऐसा न निकला,
जिस दिन नाम बहु हत्यारों के नहीं थे ।
मन भी उक्ता गया था
हो रहा था हमारा ही घाटा,
यह सोच हमने तोड़ा व्रत
कर दिया उसे उल्टा
कि "न" खाऊँगी मिर्च मसाला
जिस दिन "न" आए
बहू हत्या की करुणामयी गाथा ।।
हमारे तो मज़े हो चले थे,
पर ना जाने कितने घर
दहेज प्रथा की बली चढ़े थे..
By Sarika Vishal Dabhade

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