मेरा भारत महान
By Ashish Nagori
मेरा भारत महान
यही तो थी मेरे स्कूल की किताबों की ज़ुबान
बच्चा था जो समझाया, समझ गया
मेरे ज़ेहन में ये अच्छे से रच गया
कि देश मेरा दुनिया में सबसे महान है
क्यूँकि इस देश में सारे धर्म समान है
यहां अपनापन है, भाईचारा है, प्यार है
मेरे देश जैसे कहीं नहीं, संस्कार है
यहां अल्लाह है नानक है इशू है राम है
ओस वाली सर्द सुबह, सुनहरी सी शाम है
यहां प्रगति है तरक्की है विकास है
यहां रोज़ मरने के बाद भी जीने की आस है
यहां भगत शहीद हुआ था बापू की कुर्बानी है
यहां हवाओं में गूँजती अज़ाने और गुरबानी है
तो लगने लगा था मुझको भी, देश मेरा कुछ खास है
और तब मैं खुद से कहता था मेरे देश पे मुझको नाज़ है
फिर मैं थोड़ा बड़ा हो गया बचपन का लेसन जिंदगी के थपेड़ों में खो गया अब रोज़ नया पन्ना पढ़ता हूँ, रोज़ सीखता हूँ कुछ बातें रोज़ ढूँढता हूँ कुछ रिश्ते, रोज़ बनाता हूँ कुछ नाते देखता हूँ राम को ,रहीम से ख़फ़ा ख़फ़ा क्या यही है सालों की ,आजादी का फलसफा लुट रही है रोज़ बेटी, भोर में अँधियारे में कौन सुनता है ये चीखें ,कानूनी गलियारे में बढ़ रहा है खौफ़ का कद, सपने मेरे बौने हुए दुख दर्द के गंदे चेहरे, और घिनौने हुए खुदा नहीं जो मांगता, उस ज़मीन को पाना है माँग माँग जो मर रहे, उनको नहीं बसाना है क्यूँ भूख नहीं करती फर्क़ हिन्दू मुसलमान में क्यूँ दिखती मासूम ग़रीबी हर रोज़ श्मशान में ये देश तो मेरा है लेकिन, महान मैं किस वज़ह से बोलू इतिहास और वर्तमान के पलड़ों को आपस में कैसे तोलु करूंगा किसी और दिन, इस मुश्किल को असान तब तक मेरा भारत महान
By Ashish Nagori

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