मेरा बेटा है वो
By Abhijeet Sarkar
कुछ जानी पहचानी सी है ये शैतानियां,
खींच रही है बचपन की गलियां,
जी रहा हु उसमे खुद को,
थाम कर उसकी नन्ही हथेलियां
सब कहते है कुछ मुझसा है वो
हु मै उसमे, मेरा है बेटा है वो
खेलता मुझ संग, सोता मुझ संग
है मेरा, सिर्फ मेरा है वो
करता सिर्फ अपनी ही मनमानियां,
अब अच्छी लगती है उसकी ये शैतानियां
By Abhijeet Sarkar

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