मेरा परिवार
By Rashmi Mahish
मम्मी की गोद, पापा का कंधा
भाई का हाथ, दीदी का प्यार
दादी की डाँट और दादा का दुलार
इन सब से मिलकर बनता है सुनहरा संसार ।
दादी की डाँट और दादा का दुलार
देर तक घर नहीं आने पर फिर दादी का इंतजार
रोता हुआ देख फिर वो करती है खूब सारा प्यार ।
दादा के लड़खड़ाते कदम फिर भी है वो मस्ती के भंडार
शैतानियाँ करते हुए, यदि कही मिले मुझे मम्मी की मार
दादा मेरे सदा साथ रहते, कहते मम्मी को न मार इसे,
ये है मेरा राजकुमार ।
पापा का साथ दिखाता मुझे हर बार नया संसार
मेरे जिद के आगे वो भी जाते है हार
पापा का मैं राजकूमार यही कहते वो दुनिया से हर बार ।
मेरी मम्मी प्यारी सी करती सदा वो मुझको प्यार
चोट अगर कही लगे मुझे, दर्द होता उसे हर बार
प्यार भरे आँचल में अपने वो समेट लेती मेरा ये नटखट भरा संसार ।
भईया मेरा कभी न मानता वो किसी से हार
लड़ता दुनिया से वो मेरे लिए लगातार
शैतानियाँ मेरी बढ़ा देता मुशिकले उनके लिए हर बार
फिर भी कहते यही है वो जिसके लिए कर सकता हूँ
मैं हर खूशियाँ कुरबान ।
दीदी मेरी भोली - भाली रहता सदा उसको मेरा इंतजार
छोटे - मोटे बहाने बनाकर बचा लेती वो मम्मी से मुझे हर बार
यदि कहीं मम्मी से मुझे डॉट पड़े, हो जाता है दिल उसका बेकरार
नही कोई दुजा उसके जैसा, दीदी मेरी करती मुझे खूब सारा प्यार ।
यही है मेरा छोटा सा संसार
जिसमे करते एक दूसरे से सब प्यार
होता रहता है जिसमे खुशियों की बौछार
यही है मेरा छोटा सा प्यारा सा परिवार ।
By Rashmi Mahish

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