मेरा घर
By Bhavesh Agarwal
हर ओर एक कदम आगे बढ़ाते बढ़ाते,
मै लौटा हूं वापस मेरे पुराने घर
अभी भी याद है सड़के,
अभी भी मुझे नहीं भूलता चले जाना
वही इठलाती है अब भी टहनी
वही पुराना पेड़, नई चिडियो का घर
हवा अपनो से मिलके आई है,
मेरी ख़बर ले जा रही है साथ
सुनाई दे रहे हैं खास जगड़े
आदत से मजबूर झूमते घर
पानी को बंटते देख रहा हूं,
लोग सोच रहे हैं आज का हाल
रौशनी वक्त पर आया जाया करती है
अपनो के साथ गम भूलाता, गुनगुनाता घर
बच्चों के धुंधले सपने हैं
गौर से दिखता है दूर धुआं
कहीं पहली चाय की अंतिम चुस्की
कहीं अंतिम चाय की पहली देखता घर
दीवारों का खुदका वंश चप्पा
साथ देखता थका सोफ़ा
छत अब तक जिंदा है की
बीते कल का मुकुट पहनता घर
कुछ तो बात थी मेरे घर में अलग
जब अलग हुआ तो मुझसे बात की
अब फिर निकालना है पीछे छोड़ कर
मासूम प्यार लुटाता मेरा घर
By Bhavesh Agarwal

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