मेरा इश्क
By Amit Kanthi
न हीर राँझे जैसा, न लैला मजनू जैसा है,
मेरा इश्क तेरे साथ बस मेरे जैसा है,
इश्क मेरा एक हकीकत है, इश्क मेरा बस इश्क है|
खुदी की रँजिशों से जूझकर,
दर्द की तपिश में तपकर,
हासिल हुआ मुझे मेरा हमसफ़र है,
और कामिल उसीसे मेरा इश्क है |
न तु मेरा ख्वाब है,
न तू मेरा अरमान है,
ना ही तू मेरी तलाश है,
मेरे वजूद में जाहिर हुई, तू बस् मेरी हकीकत है|
मुझे मोहब्बत है तुझसे,
न ज्यादा है न कम है,
है तो बस इतना
के कह सकूं कि हाँ तुझसे मोहब्बत है|
मोहब्बत की नहीं है मैंने, बस हो गयी है तुमसे,
मोहब्बत तो अब हमने करली मगर,
रसमें मोहब्बत की न सीखी हमने,
इजहार-ए-मोहब्बत हो, या देने हों तोहफ़े,
शायद हर् रिवायत तोडी है मैंने,
पर गुजारिश है तुमसे न रूठना हमसे,
मैं ये नहीं कहता की हर ख्वाहिश पूरी होगी,
पर वादा है कि हर कोशिश ईमानदार होगी|
ता उम्र मेरा यही हाल होगा मेरी यही चाल होगी,
मेरी सूरत भी यही होगी मेरी सीरत भी यही होगी,
जिंदगी में मेरा अपना कुछ है तो वो मेरे लफ़्ज हैं,
ले आज मैं उन्हें भी तेरे नाम करता हूँ,
इसीसे मैं मेरे मोहब्बत का तुझसे इजहार करता हूँ|
न हीर राँझे जैसा, न लैला मजनू जैसा है,
मेरा इश्क तेरे साथ बस मेरे जैसा है|
By Amit Kanthi

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