मृण्मय से अमृत की गाथा
Updated: Jun 6, 2023
By Praveen Kumar Anshuman
मृण्मय सेअमृत की गाथा, यह अद्भुत आलय गाता है। ज्ञान, ध्यान और योग का, यह दर्शन रोज़ कराता है।।
सुंद र, शभ्र और सर म्य, हैमहात्मन की कल्पना राज करे हसुं ों केजैसा, श्रेष्ठ हैइसकी भावना गरु -शशष्य की मशहमा का, दशशन येरोज़ कराता है भारत-कथा शवरासत की, सबको रोज़ सन ाताहै
मृण्मय सेअमृत की गाथा, यह अद्भुत आलय गाता है। ज्ञान, ध्यान और योग का, यह दर्शन रोज़ कराता है।।
जगमग जगमग करता, यह अशवरल एक अशभयान है चैतन्य-शशखर पेचलता, शवहगुं म दृश्य महान है शचन्मय धारा केप्रवाह में, यहस्नान रोज़ कराता है अुंतस केअन्वेषण की, यहशवशध अकूत बताता है
मृण्मय सेअमृत की गाथा, यह अद्भुत आलय गाता है। ज्ञान, ध्यान और योग का, यह दर्शन रोज़ कराता है।।
इसकेप्राुंगण की ख़श बूमें, सग शन्धत मानव-उपवन है इसकी आत्मा मेंबसता, राष्रगान का जन गण मन है सुंद र जीवन का पयाशय, यहशशक्षा को अपनेबनाता है सुंतप्तृ तभी इसका जीवन, वास्तव मेंसाथीहो पाता है
मृण्मय सेअमृत की गाथा, यह अद्भुत आलय गाता है। ज्ञान, ध्यान और योग का, यह दर्शन रोज़ कराता है।।
सवाांगीण शवकास का सुंक ल, बना सदा यहरहताहै जीवन की गररमा का, यह मान सदाही रखता है देशभशि, करुणा और धमशका, प्रशतपल जो पाठ शसखाता है शतरुंगेको प्राुंगण मेंअपने, ऊँ चा बहुत लहराता है
मृण्मय सेअमृत की गाथा, यह अद्भुत आलय गाता है। ज्ञान, ध्यान और योग का, यह दर्शन रोज़ कराता है।।
By Praveen Kumar Anshuman

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