मुस्कुराया करो!
Updated: Jun 9, 2023
By Maaz Khan
माना के मुसीबतों ने है घेरा हुआ,
परेशानियों का हरदम बसेरा हुआ;
यूं मायूसी में दिल न दुखाया करो,
तुम मुस्कुराया करो!
माना क बड़ा मुश्किल है सफर,
मंज़िल भी कही न आ रही नज़र;
यूँ न तुम घबराय करो,
आगे बढ़ते हुए, मुस्कुराया करो!
जब तुम पर कोई ज़ुल्म ढाएगा,
तुम्हे दुःख देकर, उसे सुकून आएगा;
डरके यूँ न सर झुकाया करो,
उसकी आँखों में देख कर, मुस्कुराया करो!
जो चाहते थे, वो पा न सके,
सपनों का महल सजा न सके;
यूँ न आँसू बहाया करो,
हार कर भी, तुम मुस्कुराया करो!
जब दिल की नज़र से देख पाओगे,
लोगों के दुःख-दर्द समझ जाओगे;
तुम रूठे हुओं को हसाया करो,
यूँ ही हमेशा मुस्कुराया करो!
जब भेदभाव से ऊँचा उठ जाओगे,
हर मज़हब में अपना भाई पाओगे;
तुम सभी को गले से लगाया करो,
उन्हें देख कर, मुस्कुराया करो!
जब मंज़िल पे अपने पोहोच जाओगे,
दिल की मुरादें जब पूरी पाओगे;
आसमान की ओर सर उठाया करो,
खुदा का शुक्र करके, मुस्कुराया करो!
किसी दिन मैं भी चला जाऊंगा,
दो गज ज़मीन में सामा जाऊंगा;
मेरी कब्र पे तुम जब आया करो,
मुझे याद करके, मुस्कुराया करो.
By Maaz Khan

Comments