मुसाफिर की राह
Updated: Jan 13, 2023
By Romal Bhansali
तू चलता जा मुसाफिर,
बिना रुके, बिना थके,
बिना झुके, बिना हारे,
मंज़िलों का क्या है,
आज उसके तो कल तेरे द्वारे |
न कठिनाइयों से डर तू,
न मुसीबतों के आगे झुक तू,
तक़दीर का क्या है,
आज उसके तो कल तेरे सहारे|
हो लक्ष्य की ओर तेरा निशाना,
हर कदम पे है पसीना बहाना,
कामयाबी का क्या है,
आज उसके तो कल तेरे किनारे |
By Romal Bhansali

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