मुझे राम मिले है।।
By Nagesh Krishna Parab
खुद को ढूंढने की चाह में
लालच भरे इस समाज मे
आशा और निराशा के जाल में
ज्ञान के मुझे भंडार मिले हैं
मुझे राम मिले है।।
जब हार गया था ये तन मन
कमजोर हो गया था पूर्ण बदन
धोका मिला था अपनो से
विश्वास उड़ गया था पूरे जग से
इस जगसे लड़ने के लिए मुझे आधार मिले है
मुझे राम मिले है ।।
जीवन का सही अर्थ समझाया
बिखरे हुए मुझे सिमट के गले लगाया
निराशा भरे जीवनमे मेरे
आशा के फिरसे किरण खिले है
मुझे राम मिले है।।
By Nagesh Krishna Parab

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