मुझे मत रोको, मुझे बह जाने दो।
Updated: May 31, 2023
By Anuja Sharma
मुझे मत रोको,
मुझे बह जाने दो।
होने ना होने की कश्मकश से निकलूं
तो यह भी कह जाने दो,
कि मैं वो नहीं हूं
जो तुमसे रोज मिलता है,
में वो हूं
जो किसी के कदमों की आहट से ही
छुप जाता है,
मुझे मत रोको,
मुझे बह जाने दो।
मेरा गुनाह तो
मेरे ईश्वर को ही मालूम है,
जिसके होने में मुझको
यकीन भी नहीं,
कि मुझे दोस्त भी ना दिया कोई,
दुश्मन तो नसीब में कहां,
मुझे मत रोको,
मुझे बह जाने दो।
समंदर की आंखों में
आंखें डालकर देखूं,
तो सुकून मिलता है,
तो उसमें समा जाने से बड़ा
तो कोई ख्वाब नहीं है मेरा,
मुझे मत रोको,
मुझे बह जाने दो।
यूं भी तो,
गर खो भी जाऊं,
तो इस खाली रूह को ढूंढने
शायद ही कोई आए,
क्यों मुझे यकीन नहीं तुम पर,
ऐ खुदा!
खुद के मुखौटे तो बदल कर बात कर।
मुझे मत रोको,
मुझे बह जाने दो।
By Anuja Sharma

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