मुझे भूल जाओ
By Raj Modi
मुझ से क्यों पूछ पूछ करते हो की
इतना दुख क्यू लिखते हो,
में दुख नही लिखता,
मेरे लिए दुख ऐसे है ही नही जैसे
तुम लोगो ने बयान किया है
तुम्हें वो दुख लगता हो तो
सुख दुख के प्रकरण से
ऊपर उठने की जरूरत तुम्हें है।
तुम अपनी शहर की रेप घटना से
दो दिन में बहार आ जाते हो।
अपने देश में करोड़ों अरबों रुपए के
काले पेन देन से बाहर आ जाते हो।
विदेशो में हो रहे युद्ध और उसकी
लाखो मौत से बाहर आ जाते हो।
रोज सहर ना मन से करने पड़ते
काम से रात को बाहर आ जाते हो।
तुम दो मिनट में अपने आप से किए
वादों से बाहर आ जाते हो।
तुम रास्तों पे हाथ फैला रहे लोगो से
ऊंचे सिर बात करके बाहर आ जाते हो।
तुम इतिहास के पन्नो में दो टूटे मंदिर मज्जिद की कहानियां पढ़ के बाहर आ जाते हो।
बंध दीवारों मैं आ रही दर्द की
चीखों से बाहर आ जाते हो।
'hang that bastered' ट्वीट करके
अपनी जिन्मदारियो से बाहर आ जाते हो।
मुझे तुम्हारी व्याख्याओं में समाने की
कोशिश ना करो,
मैं इस जीवन के नंगे नाच का दर्शक हु बस,
और किसी की कहानी मुझे
तालिया बजाने लायक नही लगती,
इसीलिए भ्रम होता है की
शायद मैं भी performer हु
में नही हु, 'में' कुछ है ही नही।
मुझे भूल जाओ
By Raj Modi

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