मुखौटे
Updated: May 31, 2023
By Ankita Garg
यहाँ सबके बहुत से चेहरे हैं,
मुखोटों के जिनको पहरे हैं,
राज़ छिपे इनमें गहरे हैं,
आखों में बसे सपने अब सब ठहरे हैं,
खूबसूरती ढलती नहीं हैं उनकी चाँद सितारों में,
क्या केहना है उनकी आदाओं के बारे में,
प्यार तो है पर बयां कर नहीं पाते वो,
फिर माँ-बाप की दुहाइयाँ भी तो देते हैं वो,
कैसे छोड़ दूँ उनका साथ मैं तेरे लिए,
चार रातों की चांदनी जैसे प्यार के लिए,
होगा वही जो वो कहेंगे मुझसे,
प्यार नहीं रहा अब मुझे तुमसे,
अब और शर्मिंदा ना करो मुझे,
बस इतना केह छोड़ चले वो मुझे…
By Ankita Garg

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