मुखौटे
By Shruti Lad
कुछ खफा सा लगता है
कुछ खाली सा दिखता है
छुपाये हुए कुछ दर्द गहरे
हर कोई हमसाया सा लगता है
दिल की उदासियों पर
हंसी का मुखौटा पहने
नज़रों की तन्हाई पर
उत्साह का चश्मा पहने
दिन काट लेता है हर एक शख्स
रात की खामोशियो में
एकटक दिवार को घूर,
कुछ गहन सोच में डूबा
कुछ कशमकश में विलीन
सिसक पड़ता है हर एक शख्स
दिल की गहराइयो के राज़
अंतर में दफ़न किये
मुंह चादर में लपेट
फिर सोता है वो कुछ पल को
नई सुबह के इंतज़ार में
कुछ डर, कुछ ख्वाहिशें दबाये
अपनाकर हक़ीक़त को
चल पड़ता है ज़िन्दगी की दौड़ में
अतृप्त, असंतुष्ट
पैदा हुआ हर एक शख्स
मरते दम तक अधूरा होता है
इंतज़ार में जागता वो किसी के
इंतज़ार में सोता है !!
By Shruti Lad

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