मुकाम
By Shivi
चलते चलते थक गए हम
मंजिल का किनारा ना ढूंढ पाए हम
क्यों है जिंदगी में इतना गम
क्यों है वो उम्मीदें जो देती है गम
ना जाने क्यों आज कल दिन में भी अंधेरा दिखता है
पानी में आग दिखती है
बिन मौसम बरसात हो जाती है
इन जलती हुई लपटों में झूज कर भी हार दिखती है
क्या कमी थी उस तेल में जो आग ना लगा पाया
क्या कमी थी उस बादल में जो बरसात ना ला पाया
क्या कमी थी सूरज में जो उजाला ना ला पाया
कमी तो थी उस सुनार में जो सोने और चांदी में फर्क ना समझ पाया
क्या हर बार जीतना जरूरी है?
क्या हर बार खुद को साबित करना जरूरी है?
क्यों अपनी खूबसूरती दिखाने के लिए नाचता है मोर?
क्यों अपने आप को अच्छा दिखाने के लिए मुखोटे पहनते हैं लोग?
By Shivi

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