माशूका बहुत खूब होगी तुम्हारी
By Kamana
माशूक़ा बहुत खूब होगी तुम्हारी
मुझसी आशिक़ी निभाती है क्या वो?
माना मोहब्बत करती होगी तुमसे
पर क्या मुझ-सा इश्क़ जताती है वो?
साथ तो चल लेती होगी तुम्हारे
क्या कदमों की चाल भी मिलाती है वो?
भीगती होगी बारिशों मे साथ तुम्हारे
क्या धूप में तुम्हें अपने पल्लू में छुपाती है वो?
चाँद में देखती होगी वो भी चेहरा तुम्हारा
तारों में तुम्हारा ऐहसास पाती है क्या वो?
माना कि माशूका बहुत खूब होगी तुम्हारी
मुझ-सी आशिक़ी निभाती है क्या वो?
हमेशा साथ निभाती होगी भीड़ में
क्या मेरी तरह तुम्हारे अकेलेपन में पास आकर बैठ जाती है वो?
देखती होगी प्यार भरी निगाहों से तुम्हें
बंद आँखों से भी क्या तुम्हे देख पाती है वो?
कहती होगी अक्सर क़िस्से तुमसे कई
क्या इशारों में भी कुछ समझाती है वो?
सुनती होगी बातें तुम्हारी
क्या ख़ामोशियाँ समझ पाती है वो?
जिस्म के क़रीब तो आ ही जाती होगी
क्या तुम्हारी रूह से रूबरू हो पाती है वो?
जा रहे हो बताते तो जाओ
क्या मुझ सी दिल्लगी निभाती है वो?
माना की माशूक़ बहुत खूब होगी तुम्हारी
पर क्या मुझ-सी आशिक़ी निभाती है वो?
By Kamana

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