मातृदिवस
By Mohan Jha
प्रथम करुण क्रन्दन शिशु का जब,
माँ सुनती,तब मातृ दिवस।
शिशु दृग करे प्रथम जग दर्शन,
वही दिवस है मातृ दिवस।।
प्रथम प्रसव पीड़ा सुखदायी,
जब हो,तब ही मातृ दिवस।
शिशु जब करे पान अमॄत का,
प्रथम, दिवस वह मातृ दिवस।।
किलकारी सुन आँखें नम हों,
जब भी, तब ही मातृ दिवस।
ठेस लगे शिशु को माँ रोवे,
वही दिवस है मातृ दिवस।।
पल प्रति पल सर्जन संसृति का,
क्षण प्रति क्षण है मातृ दिवस।
जब बहुएँ बेटी माँ बनती,
वही दिवस है मातृ दिवस।।
कहो कौन सा दण्ड निमिष कण,
दिवस नहीं जो मातृ दिवस।
कृष्ण प्रथम से पूर्ण शुक्ल तक,
सभी दिवस है मातृ दिवस।।
माताओं को समर्पित।
By Mohan Jha

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