मां हिंद की भूमि नमन
By Yogesh Kumar Pradhan
मां हिंद की भूमि नमन,
है शीष झुकाए अनंत गगन।
तू जननी कोटि वीरों की
पौरुष, बल से धनी हीरों की,
वीरत्व दान जग धन्य किया
यश-मान-कीर्त अनन्य किया।
सतयुग के रघुपति राम तेरे,
यदुनंदन रघुपति राम तेरे,
जो अविरात समर का धर्म चुकाएं
वो अर्जुन,कर्ण महान तेरे।
ध्येय,शीलता के गुणी
वीरों के घर तो क्या विस्मय,
बल और पौरुष में श्रेष्ठ वही
जो ध्येयशील,अब क्या संशय।
जिसने लहू पिया वीरों का ,
मधुबन खिलाए वही चमन
मां हिंद की भूमि नमन,
है शीष झुकाए अनंत गगन।
जो सिंहनी सी वीर लड़ी
वो सुता तेरी मर्दानी थी,
मृदु करों में जो खड्ग धारी
वो झांसी वाली रानी थी।
तनय तेरा वह लकुटी धारी
सत्य अहिंसा जिसका बल,
असी धारा न धारा धनु,पर था
निश्चय पर्वत के सा अटल।
तेरे सुत का सम्मान मिला,
हमें माटी का अभिमान मिला,
हैं कृतज्ञ तेरी ममता से
तेरा तन मन,तेरा जीवन,
मां हिंद की भूमि नमन,
है शीष झुकाए अनंत गगन।
By Yogesh Kumar Pradhan

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