माँ-बाप और पत्नी
Updated: Jul 30, 2025
By Amit Sagar
तुझे पाने की चाह में गुजार दिए बरस कई
तू मुझे मिली तो सही पर पहले की तरह नहीं
सोचा था मैंने, एक सुन्दर घर बनाऊंगा
क्या पता था अपने ही माँ-बाप से दूर हो जाऊँगा
तेरी खुशियों ओर उनकी जरूरतों के बीच हूँ मैं पिस रहा
न छोड़ना चाहता हूँ तुझे, न उनसे दूर कभी रहा
हम पाल रहे हैं बच्चों को देके लाड, प्यार ओर त्याग
जैसे पाला उन्होंने, आता है मुझे याद
ऐसा न हो कुदरत, अपना रंग दिखलाये
जो कर रहे हैं हम, हमारे संग न हो जाए
कुछ गलती होगी मेरी भी, कुछ तुमने भी बोला होगा
शायद उनकी बातों को, हमने अपने तराजू से तौला होगा
जब हमारी ऊँगली छोटी थी, तब वही बने सहारा
अब उनके हाथ कमजोर हैं, तो क्यों हमने किया किनारा
माँ-बाप हो तेरे या मेरे, दोनों ही हमको प्यारे हैं
फिर क्यों सोचे हम, ये मेरे नहीं तुम्हारे हैं
मौका हैं अब भी हम, दें-दें उनको वो सम्मान
माँ-बाप से बढ़कर दुनिया में, नहीं है कोई भगवान
By Amit Sagar

Comments