माँ तेरी बहुत याद आती है
Updated: Jul 30, 2025
By Amit Sagar
माँ तेरी बहुत याद आती है
रोकता हूँ ख़ुद को बहुत
पर फिर भी तू आँसू बन कर
आँखों से छलक ही जाती है
कैसे भूल सकता हूँ
तेरे उस निःस्वार्थ प्रेम को
हर पल जो तूने मुझे अपना दिया
पाला-पौसा इतना बड़ा किया
तू हर पल मुझमे ही तो ख़ुद को खोजती थी
बड़े गर्व से 'बेटा है मेरा' यही सबको बोलती थी
कितनी रातें तू सिर्फ मेरे लिए जागी
एक छींक आते ही ना जाने कहाँ -कहाँ भागी
कैसे भूल सकता हूँ
तेरा मुझे खिलाकर ख़ुद भूखे सोना
मेरे सामने बहादुर बनना और फिर कोने में जाके रोना
हर दुख बस चुप-चाप अकेले सहना
कोई कुछ भी कहे पर हमेशा मेरे लिए खड़े रहना
एक माँ ही है जो शायद ऐसी कुर्बानी दे सकती है
बिना किसी मतलब जो ख़ुद को यूँ न्यौछावर कर सकती है
मुझे भगवान की पूजा का कोई शौक नही
तू है जब तक मुझे किसी का खौफ़ नही
तेरा ना होना मुझे हर पल अखरता है
समझ गया अब माँ के बिना घर कैसे बिखरता है
तेरे आँचल में फिर से सोने को जी करता है
माँ मेरा फिर से बच्चा होने को जी करता है
बढ़ जाऊँ कितना भी पर फिर भी बड़ा ना हो पाऊँगा
तेरे पैरो की धूल बन के ही हमेशा जीना चाहूँगा
मुझे पता है
तू जहाँ है वहाँ से भी मुझे ही देखती है
मैने खाना खाया या नही बस यही सोचती है
पर फिक्र ना कर मैं बिल्कुल अच्छा हूँ
तू जैसा छोड़ कर गयी थी
आज भी उतना ही सच्चा हूँ
बस कभी-कभी जब ज़िंदगी की परेशानियों में उलझ जाता हूँ
याद करता हूँ तुझे और फिर से सुलझ जाता हूँ ॥
By Amit Sagar

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