महासंग्राम
By Nimit Singh
ले देख शुरू हुआ महा संग्राम,
आमने-सामने है रावण-राम।
एक तरफ थी माया अपार,
दूसरी ओर सीते का प्यार।
जब तीरों से तीर टकराते थें,
भू लोक पाताल काँप जाते थे।
क्या जीत पाएंगे राजा राम?
या गूँजेगा रावण का नाम।
फिर बीच रण विभीषण आए,
श्री रामचंद्र को राह दिखलाए।
बोले विभीषण-"है मिला इसे एक वरदान"
नाभी में है इसके प्राण।
नाभी पर जो तुम वार कारोंगे,
इसका तुम संहार कारोंगे।
देख दृश्य फिर रावण बोला,
गद्दार है, तू ना भाई है,
दुश्मन से प्रीति जुडाई है।
क्या भाई भी ऐसा काम है करता?
दुश्मन का सहभागी बनता।
विभीषण बोले मान मेरी बात,
दुश्मन की अब तू शरण में आजा,
श्री राम के अब तू चरण में आजा।
पर रावण अहंकार में चूर खड़ा था,
काल न उसका दूर खड़ा था।
फिर बाण प्रभु ने साध लिया,
मृत्यु मंत्र भी जाप लिया।
नाभी पर फिर जो वार हुआ,
दुश्मन का संहार हुआ।
अंतिम साँसों पर रावण की,
श्री रामचंद्रकानामहुआ।
By Nimit Singh

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