ममता से पहले
Updated: Nov 29, 2022
By Pathan Samiya Zuber
हमें जीवन देने वह खुद जन्मी पहले
प्रसव की प्रगती के लिये थोडा-सा बस थोडा-सा सहमी पहले ।
फिर हिम्मत को अपनी ढाल बना, कठीनाई को मात दे कर
माँ बनने के आदी खुद एक लडकी कहलाई पहले ।
अंगारों सी राह पर चलते-हस्ते हस्ते-चलते अपने स्थान को खोजा पहले
प्रश्नो के हर उत्तर पर , उत्तर के हर प्रतिप्रश्नो परश्नो पर
खुद को बेबस, कमजोर, निर्भर ही पाया पहले
वह सहमी, वह धमकी, वह चिल्लई, पर एक ना सुनी किसी ने उसकी
धैर्य की परिसीमा पर भी असे अंधकार ही मिल पाया पहले ।
खुद अधिनता में घिर कर भी
एक जीव के जनन का सोचा पहले ।
ऊस पीडा को बरदाशत किया, हलका सा आवाज किया
फिर हमारे रोने पर भी वह जब मुसकाई थी पहले।
मिठाईयया खा रहे थे जब सब,
वह भीषण दर्द से तडपी थी पहले।
हमारी एक ननही किलकरी ने ऊस के दर्द को अव्हेल किया था
ऊस की पीडा को भुला दिया था ।
हमें जग दिखाने से पहले , खुद नैन भर हमें देखा पहले ।
फिर यू रोते-हस्ते हस्ते-रोते हमें हाथ में लिये ममता से जब माथे को चूमा पहले ।
फिर जब सब घर में सो रहे थे, गहरे ख्वाब में खो रहे थे
वह अपनी नीदं को त्याग कर खुशी-खुशी जागी थी पहले ।
अपनी भूक-पसंद को त्याग कर
वह तब भी और अब भी हमारे लिये जीती है पहले ।
वह हमें सूनती है, वह हमें बुनती है ।
वह गुरू भी है, वह प्रेरणा भी है
सुख दुःख की साथीन भी है, सख्त परीक्षक भी है ।
इन सब के होते हूए भी; हमारे अस्तिथव का करण है पहले ।
हम कूछ भी नही उस के परिश्रम से पहले
उस की ममता से पहले।।
By Pathan Samiya Zuber

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