मनुष्यता को धूल कर !!
By Vishal Chaudhary
विभत्स विभोर हो रहे,
सब द्वंद्व अपने भूलकर,
अघोर उद्दंड हो रहे,
हिंसत्व का झूला झूल कर !!
प्रचण्ड अखण्ड बढ़ रहे,
सब अपना पराया भूलकर,
श्वासों में दंभ भर रहे,
अपने प्रभुत्व पर गुरूर कर !!
अनंत ज्वलंत जल रहे,
वेदना हृदय की भूलकर,
सब कालकूट कूट रहे,
स्वयं को विष में चूर कर !!
विरुद्ध युद्ध लड़ रहे,
ज्ञान बुद्ध भूलकर,
पापों से शुद्ध कर रहे,
द्वेषों से वक्ष फूल कर !!
मृत्यु से विश्व सींच रहे,
अमृत्व भाव भूलकर,
धरा लहु से रंग रहे,
रूहों को शूल शूल कर !!
चक्रव्यूह में फँस रहे,
गीता का ज्ञान भूलकर,
बस लोभ मोह रट रहे,
खुद ही से खुद को दूर कर !!
राम की ही बात करते,
राम जी को भूलकर,
हम निर्मनुष्य जीव हो रहे,
मनुष्यता को धूल कर !!
By Vishal Chaudhary

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