मन में एक सागर हो
By Akshita Goyal
मन में एक सागर हो
चाहत की लहरों का
जिंदगी का पानी हो
समय हो सदियों का
इस पानी की तासीर हो
नदियों सा बहने की
धरती सी हो सहनशील
पर एक हद हो सहने की
जो रास्ते में मुश्किल पडाव हो
कोई अनदेखा झुकाव हो
तो झरने सा साहस धरना होगा
ऊंचाई को गिर कर पार करना होगा
पर जो तुम्हारे साहस में जोर होगा
हर तरफ उस साहस का शोर होगा
लाख चट्टानों से जब टकराओगी
अपनी बहादुरी का बिगुल बजाओगी
जो लोग साथ दिख रहे हैं
वो साथ नहीं किनारे पर है
पानी का साथ तो बस पानी हैं
बाकी सभी किनारे पर हैं
तुम यू तो असीमित हो
पर कभी कभी बँधा हुआ पाओगी खुद को
ऐसे में हाथ कोई नौका लगे
और अपना अस्तित्व छोटा लगे
तुम ये सब छोड़कर जा सकती हो
पर पहले खुद की गहराई को नापना
नापना, कि कहां तक उस आकाश को ताक सकती हो
गौर करना, उस आकाश मे
उम्मीद का सूरज रोशन हैं
माना वो मीलों दूर हैं
और बहुत गहरा ये मन हैं
पर जो कोई सही राह पर बढ़ता रहता हैं
ये सूरज धीरे-धीरे ऊपर चढ़ता रहता हैं
उम्मीद की किरणें ऐसे ही तेज हो
और बूंदों का दामन थाम ले
फिर ओस बन जाने की कोशिश हो और
आंसुओं का वो मन उड़ान ले
By Akshita Goyal

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