मदारी
By Nisarg Shah
खेल यह अजीब है,
देखने वाले का नसीब है।
खिलाड़ी इसमे दो है,
दोनो के आपस में मोह है।
एक उनमे से नेता है,
क्योंकि वह आदेश देता है।
दूसरा आज्ञाकारी है,
और खेल का नाम मदारी है।
एक खिलाड़ी है नादान,
सबसे बड़ा है उसका खानदान।
समझा जाता है की उसमे बुद्धि है चंद,
पर होता है वे सबसे अक्लमंद।
बहुत ताकत है उसके अंदर,
नाम है उसका बंदर।
दोस्ती का यह स्वरूप है,
इनकी मेहनत का प्रारूप है।
एक दूसरे का सहारा है,
एक दूसरे का संभालते किनारा है।
अजब सा यह मेल है,
मदारी यह खेल है।
By Nisarg Shah

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