मत आजमाओ
By Swapna Jyoti
मेरा इतना इम्तहान ना लो
मुझे इतना ना तड़पाओ
पागलपन नहीं दीवानापन है ये मेरा
मेरी चाहत पे ऐसे सवाल ना उठाओ।
और कितना परखोगे मुझे
और कितने दौर से गुजरना होगा मेरे दिल को
सुनो… अब तो लोग पागल कहने लगे हैं मुझे
मेरी आशिकी को इतना भी मत आजमाओ।
थोड़ी फुरसत निकालो जान इस आजमाइश से
आदत सी होती जा रही है मुझे इसकी
एक बार कुबूल तो करो मेरे दिल के नजराने को
मैं तैयार हूं तुम्हे सब नजर करने को
तुम्हारी पहली झलक से ही बहुत सी लहरें उठ चुकी हैं मुझमें
अपनी अदाओं का कहर मुझपे अब और ना बरसाओ
…कि लोग पागल कहने लगे हैं मुझे
मेरी आशिकी को इतना भी मत आजमाओ।
कभी रोशन करो मेरी तन्हाइयों को
जहां तुम्हारी ही यादें होती हैं
मैं,मेरा दिल,मेरी डायरी,मेरा कमरा
सब में तुम्हारी ही बातें होती हैं
एक बार थामो मेरा हाथ तो हयात
मैं तैयार हूं उम्रभर साथ तुम्हारे हाथ पकड़ के चलने को
देखो तुम्हारे सवालों में पहले ही बहुत उलझे हुए हैं
अब अपनी मासूमियत में इतना भी ना बहकाओ
…कि लोग पागल कहने लगे हैं मुझे
मेरी आशिकी को इतना भी मत आजमाओ।
मेरा इतना इम्तहान ना लो
मुझे अपने लफ्जों में ना फसाओ
पागलपन नहीं दीवानापन है ये मेरा
मेरे प्यार पे ऐसे उंगलियां ना उठाओ
और कितना जवाब चाहिए तुम्हे
और कितने सवाल करोगे तुम..?
देखो मैं वैसे ही मदहोश हूं तुम्हारी धुन में
मुझे अपनी निगाहों से और बेसुध ना बनाओ
सुनो…लोग पागल कहने लगे हैं मुझे
मेरी आशिकी को इतना भी मत आजमाओ।
By Swapna Jyoti

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