भ्रम और विभ्रम
By Shashank Kumar Sinha
मैं भ्रम हूं, तुम्हारे लिए
और तुम विभ्रम हो, मेरे लिए |
जो देखती हो वो नहीं हूं मैं
और मैं बिन तुम्हारे तुम में खोया हुआ हूं |
जो सोचती हो वो नहीं हूं मैं,
और मैं बिन तुम्हारे तुम्हें आलिंगन में लिए खोया हुआ हूँ |
बिन जाने मुझे तुम
नफरत करती हो मुझसे
और मैं बिन तुम्हारे,
तुम्हारे साथ ज़िंदगी बिता रहा हूं |
कहता हूं मैं इसलिए,
मैं भ्रम हूं, तुम्हारे लिए
और तुम विभ्रम हो, मेरे लिए
आज जहां भी अच्छाई पाओगी
मैं वहाँ तुम्हें नजर आऊंगा
और मैं बिन तुम्हारे कहीं भी
तुम्हारे साथ चलता जाऊँगा |
तुम मुझसे दूर रहोगी
फिर भी हर व्यावहार में नजर आऊंगा
और मैं बिन तुम्हारे तुमसे प्यार करता जाऊँगा |
तुम समझी हो शत्रु मुझे,
तुम करती हो नफरत मुझसे,
और मैं बिन तुम्हारे, तुमसे
प्रेरित होता रहूँगा |
तुम मुझे न जानना चाहती हो,
तुम मुझे न अपनाना चाहती हो,
तुम भ्रमित हो मेरे इस रूप से,
तुम घृणित हो मेरे इस रंग से,
और मैं बिन तुम्हारे, तुम्हें
अपने हर कोशिकाओं में महसूस कर रहा हूँ |
कहता हूं मैं, इसलिए
मैं भ्रम हूं तुम्हारे लिए
औरतुमविभ्रमहो, मेरेलिए ||
By Shashank Kumar Sinha

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